उत्तर प्रदेश विधानभवन का इतिहास / UP Vidhanbhavan History

9/2/2026

उत्तर प्रदेश विधानभवन का इतिहास / UP Vidhanbhavan History

उत्तर प्रदेश विधान भवन : इतिहास और निर्माण यात्रा

उत्तर प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और लोकतांत्रिक परंपरा की पहचान उत्तर प्रदेश विधान सभा (विधान भवन) केवल एक प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीतिक और स्थापत्य विरासत का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। इसका भव्य स्वरूप, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अनूठी वास्तुकला इसकी निर्माण यात्रा को बेहद दिलचस्प बनाती है।

उत्तर प्रदेश विधान भवन नींव (Foundation Stone)

इस ऐतिहासिक भवन के निर्माण की शुरुआत 15 दिसंबर 1922 को हुई, जब तत्कालीन गवर्नर सर स्पेंसर हारकोर्ट बटलर ने इसकी आधारशिला रखी। यही वह क्षण था, जब उत्तर प्रदेश के इस भव्य विधान भवन के निर्माण की औपचारिक यात्रा प्रारंभ हुई।

उत्तर प्रदेश विधान भवन उद्घाटन (Inauguration)

लगभग पाँच वर्षों से अधिक समय तक चले निरंतर निर्माण कार्य के बाद यह भव्य भवन तैयार हुआ। इसका विधिवत उद्घाटन 21 फरवरी 1928 को किया गया।

उत्तर प्रदेश विधान भवन निर्माण लागत (Cost)

आज जिस विधान भवन की भव्यता हमें आकर्षित करती है, उसके निर्माण के लिए उस समय लगभग 21 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। उस दौर के हिसाब से यह एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण निर्माण परियोजना थी।

उत्तर प्रदेश विधान भवन वास्तुकला शैली (Architectural Style)

उत्तर प्रदेश विधान भवन की सबसे खास विशेषताओं में इसकी वास्तुकला शामिल है। यह भवन इंडो-यूरोपियन (Indo-European) और गोथिक शैली की उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण है।

इस भवन का आकार अर्धचंद्राकार (Crescent-shaped) है। इसके मुख्य केंद्र में बना विशाल गोथिक गुंबद इसकी भव्यता को और अधिक आकर्षक बनाता है।

उत्तर प्रदेश विधान भवन निर्माण में प्रयुक्त सामग्री (Materials Used)

विधान भवन को मजबूत और आकर्षक बनाने के लिए विशेष प्रकार की निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया। इसके बाहरी निर्माण में मिर्जापुर के चुनार क्षेत्र के हल्के भूरे रंग के बलुआ पत्थरों (Sandstone) का प्रयोग किया गया है। वहीं भवन के आंतरिक हिस्सों तथा सीढ़ियों को सुंदर और भव्य रूप देने के लिए आगरा और जयपुर के संगमरमर (Marble) का इस्तेमाल किया गया है।

उत्तर प्रदेश विधान भवन ऐतिहासिक महत्व

उत्तर प्रदेश विधान भवन को प्रारंभ में काउंसिल हाउस’ (Council House) के नाम से जाना जाता था। बाद में वर्ष 1937 से यह भवन उत्तर प्रदेश के विधानमंडल, अर्थात् विधान सभा और विधान परिषद, की बैठकों का प्रमुख केंद्र बन गया। इस प्रकार उत्तर प्रदेश विधान भवन केवल एक ऐतिहासिक इमारत ही नहीं, बल्कि प्रदेश की लोकतांत्रिक यात्रा, स्थापत्य कला और राजनीतिक इतिहास का जीवंत प्रतीक भी है।

उत्तर प्रदेश विधान भवन — स्मरणीय बिंदु

1. आधारशिला — 15 दिसंबर 1922

o रखी: सर स्पेंसर हारकोर्ट बटलर

2. उद्घाटन — 21 फरवरी 1928

o निर्माण में लगभग 5 वर्ष से अधिक समय लगा।

3. निर्माण लागतलगभग 21 लाख रुपये

4. पुराना नामकाउंसिल हाउस (Council House)

5. वास्तुकला शैली

o इंडो-यूरोपियन शैली

o गोथिक शैली

6. भवन का आकारअर्धचंद्राकार (Crescent-shaped)

7. मुख्य आकर्षणभवन के केंद्र में बना विशाल गोथिक गुंबद

8. निर्माण सामग्री

o मिर्जापुर के चुनार का हल्का भूरा बलुआ पत्थर

o अंदरूनी भागों एवं सीढ़ियों में आगरा और जयपुर का संगमरमर

9. वर्ष 1937 सेयह भवन विधान सभा और विधान परिषद की बैठकों का प्रमुख केंद्र बना।

10.महत्वउत्तर प्रदेश की लोकतांत्रिक परंपरा, राजनीतिक इतिहास और स्थापत्य विरासत का प्रमुख प्रतीक।

इलाहाबाद से लखनऊ तक: उत्तर प्रदेश की राजधानी बनने का ऐतिहासिक सफर

उत्तर प्रदेश की राजधानी आज लखनऊ है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रिटिश काल में प्रदेश की सत्ता का प्रमुख केंद्र इलाहाबाद हुआ करता था? इलाहाबाद से लखनऊ तक राजधानी के स्थानांतरण की यह यात्रा उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।

1. इलाहाबाद का ऐतिहासिक महत्व

ब्रिटिश शासन के दौरान उत्तर प्रदेश को 'संयुक्त प्रांत' (United Provinces) के नाम से जाना जाता था।
1858 से 1921 तक इलाहाबाद इस प्रांत की राजधानी रहा।

इस अवधि में—

  • प्रांत का प्रमुख प्रशासनिक कामकाज इलाहाबाद से संचालित होता था।
  • ब्रिटिश शासन के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालय यहीं स्थित थे।
  • इलाहाबाद राजनीतिक, प्रशासनिक और न्यायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन गया था।

इस प्रकार लगभग छह दशकों तक इलाहाबाद संयुक्त प्रांत की प्रशासनिक व्यवस्था का केंद्र रहा।

2. राजधानी बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

समय के साथ ब्रिटिश प्रशासन के सामने नई राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियाँ उत्पन्न होने लगीं।

विशेष रूप से—

  • स्वतंत्रता आंदोलन लगातार तेज हो रहा था।
  • प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
  • इतने बड़े प्रांत के संचालन के लिए अधिक केंद्रीय स्थान की आवश्यकता थी।

इन्हीं परिस्थितियों में अंग्रेजी शासन ने राजधानी को इलाहाबाद से किसी अधिक उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।

3. लखनऊ को ही क्यों चुना गया?

राजधानी के लिए लखनऊ का चयन कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण था।

भौगोलिक दृष्टि से : लखनऊ संयुक्त प्रांत के अपेक्षाकृत केंद्रीय भाग में स्थित था, जिससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के साथ प्रशासनिक संपर्क अधिक सुविधाजनक हो सकता था।

प्रशासनिक दृष्टि से : लखनऊ पहले से ही एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित हो चुका था।

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से ... नवाबों के समय से ही लखनऊ—

  • राजनीति,
  • प्रशासन,
  • कला,
  • संस्कृति और
  • स्थापत्य

का एक प्रमुख केंद्र रहा था। इन्हीं विशेषताओं के कारण लखनऊ राजधानी के लिए उपयुक्त माना गया।

राजधानी परिवर्तन की समय-यात्रा

1858–1921 : इलाहाबाद का दौर : 1858 से 1921 तक इलाहाबाद संयुक्त प्रांत की राजधानी रहा। यहीं से प्रदेश की प्रमुख प्रशासनिक गतिविधियाँ संचालित की जाती थीं।

1921 : ऐतिहासिक परिवर्तन : वर्ष 1921 में संयुक्त प्रांत की राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया। तत्कालीन गवर्नर सर हार्कोर्ट बटलर ने अपना मुख्यालय इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित कर दिया। इसे लखनऊ के प्रदेश की नई प्रशासनिक राजधानी बनने की दिशा में निर्णायक कदम माना जाता है।

1921–1935 : प्रशासनिक स्थानांतरण का दौर : राजधानी बदलने की प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी नहीं हुई। धीरे-धीरे—

  • प्रमुख सरकारी कार्यालय,
  • प्रशासनिक विभाग और
  • महत्वपूर्ण सरकारी महकमे इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित किए गए।

1935 : लखनऊ बना सत्ता का प्रमुख केंद्र

1935 तक प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय लखनऊ पहुँच गए और लखनऊ संयुक्त प्रांत की सत्ता एवं प्रशासन का मुख्य केंद्र बन गया।

स्वतंत्र भारत में लखनऊ की स्थिति

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी लखनऊ का राजधानी के रूप में महत्व बना रहा।

24 जनवरी 1950

24 जनवरी 1950 को 'संयुक्त प्रांत' (United Provinces) का नाम बदलकर 'उत्तर प्रदेश' कर दिया गया।

एक नजर में पूरी यात्रा

1858 ➡️ इलाहाबाद संयुक्त प्रांत की राजधानी

1858–1921 ➡️ प्रशासनिक केंद्र के रूप में इलाहाबाद का प्रमुख स्थान

1921 ➡️ राजधानी इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू. ➡️ गवर्नर सर हार्कोर्ट बटलर का मुख्यालय लखनऊ स्थानांतरित

1921–1935 ➡️ प्रमुख प्रशासनिक कार्यालयों का क्रमिक स्थानांतरण

1935 ➡️ लखनऊ सत्ता और प्रशासन का मुख्य केंद्र

24 जनवरी 1950 ➡️ संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश

1950 से वर्तमान तक ➡️ लखनऊ — उत्तर प्रदेश की राजधानी ➡️ इलाहाबाद — महत्वपूर्ण न्यायिक केंद्र

परीक्षा हेतु स्मरणीय बिंदु

  • ब्रिटिश काल में उत्तर प्रदेश को संयुक्त प्रांत (United Provinces) कहा जाता था।
  • 1858 से 1921 तक इलाहाबाद प्रांत की राजधानी रहा।
  • 1921 में राजधानी को इलाहाबाद से लखनऊ स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
  • तत्कालीन गवर्नर सर हार्कोर्ट बटलर ने अपना मुख्यालय लखनऊ स्थानांतरित किया।
  • 1935 तक प्रमुख प्रशासनिक विभाग लखनऊ पहुँच गए।
  • 24 जनवरी 1950 को संयुक्त प्रांत का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश किया गया।
  • उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ बनी रही।
  • इलाहाबाद ने अपनी महत्वपूर्ण न्यायिक पहचान बनाए रखी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का राजनीतिक सफ़र

उत्तर प्रदेश राज्य में द्विसदनीय विधानमंडल है, जिसमें उच्च सदन विधान परिषद और निम्न सदन विधान सभा शामिल हैं। यह भारत का सबसे बड़ा विधानमंडल है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में 403 निर्वाचित सदस्य हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सदस्य हैं। 1967 से पहले, विधान सभा की सदस्य संख्या 431 थी, जिसमें एक मनोनीत एंग्लो-इंडियन सदस्य शामिल था, जिसे संशोधित करके 426 कर दिया गया, जिसमें एक मनोनीत एंग्लो-इंडियन सदस्य शामिल था। 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश राज्य के पुनर्गठन और उत्तराखंड के गठन के बाद, विधान सभा की सदस्य संख्या घटकर 404 हो गई, जिसमें एक मनोनीत एंग्लो-इंडियन सदस्य शामिल था। 25 जनवरी 2020 को लागू हुए संविधान (104वां संशोधन) अधिनियम, 2019 के बाद एंग्लो-इंडियन सदस्य को मनोनीत करने का प्रावधान समाप्त कर दिया गया। वर्तमान में विधान सभा की सदस्य संख्या 403 है। विधान सभा का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, जब तक कि इसे पहले भंग न कर दिया जाए। पहली विधान सभा का गठन 8 मार्च, 1952 को हुआ था। तब से इसका गठन अठारह बार हो चुका है। वर्तमान अठारहवीं विधान सभा का गठन 11 मार्च, 2022 को हुआ।

प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र के प्रारंभ में और वर्ष के पहले सत्र के प्रारंभ में, राज्यपाल दोनों सदनों को संबोधित करते हैं और विधानमंडल को सत्र बुलाने के कारणों से अवगत कराते हैं। इसके अतिरिक्त, राज्यपाल वर्ष के दौरान समय-समय पर दोनों सदनों को बुलाते हैं। अध्यक्ष और उप-अध्यक्ष का चुनाव विधान सभा के सदस्यों द्वारा अपने बीच से किया जाता है। उत्तर प्रदेश विधान सभा और विधान परिषद के कक्ष ऐतिहासिक शहर लखनऊ में स्थित हैं, जो अपने गौरवशाली अतीत और सांस्कृतिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है।

माननीय योगी आदित्यनाथ 19 मार्च, 2017 से लगातार दो कार्यकालों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री और सदन के नेता हैं। माननीय श्री सतीश महाना 29 मार्च, 2022 से विधानसभा अध्यक्ष हैं। माननीय श्री माता प्रसाद पांडे 28 जुलाई, 2024 से विपक्ष के नेता हैं।

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