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भारत में आर्द्रभूमि संरक्षण, उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और वैश्विक खाद्य सुरक्षा से संबंधित तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रम चर्चा में हैं। इनका सीधा संबंध UPPCS, UPSC, RO/ARO और अन्य राज्य स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं से है।
15 अक्टूबर को भारत में दो नए रामसर स्थलों की घोषणा की गई, जबकि उत्तर प्रदेश में नए भवन विनियमों के माध्यम से औद्योगिक विकास को अधिक व्यवस्थित बनाने की पहल हुई है। वहीं 16 अक्टूबर को मनाया जा रहा विश्व खाद्य दिवस खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की चुनौतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित करता है।
इन तीनों खबरों में पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, उत्तर प्रदेश विशेष, भारतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, संविधान और अंतरराष्ट्रीय संगठनों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य शामिल हैं।
रामसर स्थल
भारत की कुल संख्या
UP भवन विनियम
12 अक्टूबर की अधिसूचना
विश्व खाद्य दिवस
हर वर्ष आयोजन
खबर 1: सौज झील (मैनपुरी, उत्तर प्रदेश) एवं सुखना आर्द्रभूमि (चंडीगढ़) को रामसर सूची में शामिल किया गया। घोषणा — 15 अक्टूबर 2026।
खबर 2: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में Model Building Regulations 2026 का नया नियामकीय ढाँचा।
खबर 3: विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम — “Innovate today. Nourish tomorrow.”
15 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने घोषणा की कि भारत में दो नए रामसर स्थल शामिल किए गए हैं।
इनमें उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की सौज झील (Sauj Jheel) तथा चंडीगढ़ की सुखना आर्द्रभूमि (Sukhna Wetland) शामिल हैं।
इन दोनों आर्द्रभूमियों के शामिल होने के बाद भारत में रामसर स्थलों की कुल संख्या 103 हो गई है।
सौज झील — रामसर स्थल संख्या 2603।
सुखना आर्द्रभूमि — रामसर स्थल संख्या 2602।
दोनों स्थलों की घोषणा — 15 अक्टूबर 2026।
संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौता — रामसर कन्वेंशन, 1971।
यह उपलब्धि जल सुरक्षा, जैव विविधता, प्रवासी पक्षियों के संरक्षण तथा स्थानीय आजीविका की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित है।
यह गंगा नदी के विस्तृत बाढ़-मैदानी क्षेत्र से संबंधित एक उथली आर्द्रभूमि है, जो कृषि भूमि से घिरी हुई है।
सौज झील के निकट समान पक्षी विहार (Saman Bird Sanctuary) स्थित है। समान पक्षी विहार भी अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि है।
इस क्षेत्र का महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
यह स्थानीय और प्रवासी जलपक्षियों को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है।
यहाँ कमल तथा जंगली गन्ने जैसी आर्द्रभूमि वनस्पतियाँ पाई जाती हैं।
यह सारस क्रेन और ग्रेटर स्पॉटेड ईगल जैसे पक्षियों के संरक्षण में योगदान देता है।
यह क्षेत्र नियमित रूप से 30,000 से अधिक जलपक्षियों को आश्रय प्रदान करता है।
सौज झील को Important Bird and Biodiversity Area (IBA) के रूप में भी पहचाना गया है।
PCS के लिए महत्वपूर्ण: सौज झील और समान पक्षी विहार, दोनों मैनपुरी जिले से जुड़े महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि स्थल हैं।
सुखना आर्द्रभूमि चंडीगढ़ में शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है।
यह एक मानव-निर्मित जलाशय है, जिसका महत्व शहरी पारिस्थितिकी और प्रवासी पक्षियों के संरक्षण से जुड़ा है।
प्रमुख विशेषताएँ:
यह चंडीगढ़ में स्थित है।
यह Central Asian Flyway (मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग) से संबंधित पक्षियों को आश्रय प्रदान करता है।
यहाँ कॉमन पोचार्ड, पलास फिश ईगल तथा ब्लैक पॉन्ड टर्टल जैसी महत्वपूर्ण प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
यह वर्षा जल, अवसाद और जलग्रहण क्षेत्र के प्रबंधन में उपयोगी है।
सुखना आर्द्रभूमि यह दर्शाती है कि शहरी क्षेत्रों में स्थित जल निकाय भी जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक तथा अन्य नदियों के विस्तृत मैदान पाए जाते हैं। इसलिए राज्य में विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक एवं मानव-निर्मित आर्द्रभूमियाँ विकसित हुई हैं।
1. ऑक्सबो झीलें (Oxbow Lakes)
नदियों के विसर्प या घुमाव वाले भाग के मुख्य नदीधारा से कट जाने पर इनका निर्माण होता है। ये गंगा के मैदानी क्षेत्र में विशेष महत्व रखती हैं।
2. बाढ़-मैदानी आर्द्रभूमियाँ (Floodplain Wetlands)
ये नदी के बाढ़ क्षेत्र से संबंधित होती हैं। मानसूनी वर्षा और नदियों के जलस्तर में परिवर्तन इनके स्वरूप को प्रभावित करते हैं।
3. उथली प्राकृतिक झीलें एवं दलदली क्षेत्र
इनमें मौसमी या स्थायी जलभराव होता है तथा ये मछलियों, पक्षियों और जलीय वनस्पतियों को आवास प्रदान करती हैं।
4. मानव-निर्मित जलाशय
सिंचाई, जलापूर्ति, मत्स्यपालन या अन्य उद्देश्यों के लिए विकसित जल निकाय भी आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी का हिस्सा बन सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में नदी-आधारित बाढ़-मैदानी आर्द्रभूमियाँ, उथली झीलें, तालाब और मानव-निर्मित जलाशय विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
बखिरा वन्यजीव अभयारण्य (Bakhira Wildlife Sanctuary)
संत कबीर नगर जिले में स्थित मीठे पानी की आर्द्रभूमि। यह स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण है।
सूर सरोवर (Sur Sarovar)
आगरा जिले में स्थित यह आर्द्रभूमि कीठम झील के नाम से भी प्रसिद्ध है।
अपर गंगा नदी (Upper Ganga River)
बृजघाट से नरौरा तक गंगा नदी का महत्वपूर्ण रामसर क्षेत्र, जिसका संबंध नदीय जैव विविधता और गंगा डॉल्फिन के संरक्षण से है।
1. कृषि अपवाह एवं यूट्रोफिकेशन (Eutrophication)
खेती में प्रयुक्त उर्वरकों से नाइट्रोजन और फॉस्फोरस वर्षा जल के साथ आर्द्रभूमियों में पहुँच सकते हैं।
इससे शैवाल तथा जलीय पौधों की अत्यधिक वृद्धि होती है। परिणामस्वरूप घुलित ऑक्सीजन की कमी और जलीय जीवों के लिए प्रतिकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
यूट्रोफिकेशन का प्रमुख कारण जल में पोषक तत्वों, विशेषकर नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की अत्यधिक उपलब्धता है।
2. अतिक्रमण एवं भूमि उपयोग परिवर्तन
कृषि विस्तार, अवैध निर्माण और जल निकासी के कारण आर्द्रभूमियों का प्राकृतिक क्षेत्र घट सकता है।
3. भूजल दोहन
अनियंत्रित भूजल निकासी से भूजल पर निर्भर आर्द्रभूमियों की जल उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
4. जलवायु परिवर्तन
अनियमित मानसून, लंबे शुष्क काल और अचानक अधिक वर्षा से आर्द्रभूमियों का जल संतुलन बदल सकता है।
5. आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ
जल में तेजी से फैलने वाली कुछ आक्रामक वनस्पतियाँ स्थानीय जैव विविधता और जल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं।
रामसर कन्वेंशन
अपनाया गया — 2 फरवरी 1971, रामसर, ईरान।
भारत में प्रभावी — 1 फरवरी 1982।
प्रमुख उद्देश्य — आर्द्रभूमियों का संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग।
सचिवालय — ग्लैंड (Gland), स्विट्जरलैंड।
Wetlands International
यह आर्द्रभूमियों एवं जलीय पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण पर कार्य करने वाला अंतरराष्ट्रीय गैर-लाभकारी संगठन है। यह अनुसंधान, संरक्षण कार्यक्रमों और नीति संबंधी प्रयासों में योगदान देता है।
भारत में संरक्षण का ढाँचा
आर्द्रभूमि (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017।
राष्ट्रीय आर्द्रभूमि संरक्षण संबंधी कार्यक्रम।
अमृत धरोहर पहल।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरणों की भूमिका।
1. जिला स्तर पर विकेंद्रीकृत आर्द्रभूमि प्रबंधन — स्थानीय प्रशासन, ग्राम पंचायतों और समुदायों की भागीदारी से संरक्षण योजनाएँ बनाना।
2. वैज्ञानिक निगरानी — GIS, Remote Sensing और जल गुणवत्ता परीक्षण के माध्यम से आर्द्रभूमियों के क्षेत्रफल एवं पारिस्थितिक स्थिति की निगरानी।
3. प्रदूषण नियंत्रण — कृषि अपवाह, घरेलू अपशिष्ट और अन्य प्रदूषण स्रोतों को कम करना।
4. सामुदायिक भागीदारी — स्थानीय आजीविका और संरक्षण के बीच संतुलन विकसित करना।
5. टिकाऊ इको-टूरिज्म — संवेदनशील पक्षी आवासों को सुरक्षित रखते हुए नियंत्रित पर्यटन को बढ़ावा देना।
भारत के रामसर स्थल — 103 (15 अक्टूबर 2026)
नवीनतम स्थल — सौज झील एवं सुखना आर्द्रभूमि।
सौज झील — मैनपुरी, उत्तर प्रदेश।
सौज झील का रामसर स्थल संख्या — 2603।
सुखना आर्द्रभूमि — चंडीगढ़, स्थल संख्या 2602।
समान पक्षी विहार — मैनपुरी।
रामसर कन्वेंशन — 1971।
रामसर सचिवालय — ग्लैंड, स्विट्जरलैंड।
विश्व आर्द्रभूमि दिवस — 2 फरवरी।
भारत में आर्द्रभूमियों का संरक्षण केवल जैव विविधता बचाने का प्रयास नहीं है, बल्कि जल सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन, बाढ़ नियंत्रण और ग्रामीण आजीविका की दृष्टि से भी आवश्यक है।
“पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए सतत आर्द्रभूमि प्रबंधन को जिला स्तर पर विकेंद्रीकृत करते हुए स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।”
उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में भवन निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से Model Building Regulations, 2026 को मंजूरी दी है।
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने 9 अक्टूबर 2026 को इन विनियमों को मंजूरी दी। इसके बाद 12 अक्टूबर 2026 को संबंधित अधिसूचना जारी की गई।
इनका प्रमुख उद्देश्य औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधिसूचित क्षेत्रों में भवन निर्माण और अनुमोदन प्रक्रियाओं के लिए एक समान नियामकीय व्यवस्था विकसित करना है।
नई व्यवस्था से औद्योगिक निर्माण, आवासीय परियोजनाओं, वाणिज्यिक गतिविधियों और भूमि उपयोग संबंधी प्रक्रियाओं में स्पष्टता बढ़ने की अपेक्षा है।
1. भवन निर्माण अनुमोदन में सुगमता
भवन मानचित्र स्वीकृति और संबंधित अनुमतियों की प्रक्रिया को अधिक सरल एवं पारदर्शी बनाना।
2. औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन
विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निर्माण संबंधी प्रक्रियागत अनिश्चितताओं को कम करना।
3. भूमि का अनुकूलतम उपयोग
निर्माण की ऊँचाई, क्षेत्रफल, भवन घनत्व और भू-उपयोग से संबंधित मानकों के माध्यम से उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना।
4. नियोजित शहरी विकास
बुनियादी ढाँचे, यातायात, पार्किंग, जल निकासी और भवन सुरक्षा जैसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखना।
5. विनियमों में एकरूपता
विभिन्न औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के बीच नियामकीय असंगतियों को कम करना।
इन नियमों का संबंध उत्तर प्रदेश के अधिसूचित औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्रों से है।
| प्राधिकरण | प्रमुख क्षेत्र |
|---|---|
| NOIDA | गौतमबुद्ध नगर |
| Greater Noida | ग्रेटर नोएडा क्षेत्र |
| YEIDA | यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र |
| GIDA | गोरखपुर क्षेत्र |
| BIDA | बुंदेलखंड क्षेत्र |
| UPSIDA | राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्र |
| UPEIDA | एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास से संबंधित अधिसूचित क्षेत्र |
परीक्षा विशेष: इन नियमों का प्रमुख वैधानिक आधार उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 है।
इन नियमों को उत्तर प्रदेश के सामान्य विकास प्राधिकरणों के लिए बनाए गए Model Building Bye-Laws 2025 से अलग समझना चाहिए।
Ease of Doing Business का अर्थ व्यापार या उद्योग स्थापित करने और संचालित करने से संबंधित प्रक्रियाओं को अधिक सरल, समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाना है।
नई भवन विनियम व्यवस्था निम्न प्रकार से सहायक हो सकती है:
अनुमोदन प्रक्रिया में स्पष्टता: निवेशकों को आवश्यक अनुमति, तकनीकी मानकों और दस्तावेजों की बेहतर जानकारी।
परियोजना लागत में संभावित कमी: अनावश्यक प्रक्रियागत विलंब कम होने से परियोजनाओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ घट सकता है।
निवेशकों का विश्वास: अपेक्षाकृत स्थिर और एकरूप नियामकीय व्यवस्था निवेश निर्णयों को प्रोत्साहित कर सकती है।
औद्योगिक विस्तार: विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी तथा संबंधित सेवा क्षेत्रों के विकास को समर्थन।
महत्वपूर्ण: नियामकीय सुधार निवेश बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन निवेश, रोजगार अथवा आर्थिक उत्पादन में किसी निश्चित वृद्धि की गारंटी नहीं देते।
औद्योगिक विकास का प्रभाव केवल उद्योगपतियों तक सीमित नहीं रहता।
औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी, विद्यार्थी और अन्य नागरिक निवास करते हैं।
इसलिए नियोजित भवन निर्माण से निम्न लाभ हो सकते हैं:
1. बेहतर आवासीय सुविधाएँ: नियोजित आवासीय परियोजनाओं से रहने के विकल्पों में सुधार।
2. यातायात व्यवस्था: सड़क संपर्क, पार्किंग और आवागमन की बेहतर योजना।
3. सार्वजनिक सुविधाएँ: जलापूर्ति, जल निकासी, सार्वजनिक स्थान और अन्य नागरिक सेवाओं की व्यवस्था।
4. सुरक्षित भवन निर्माण: अग्नि सुरक्षा, संरचनात्मक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मानकों का पालन।
5. पर्यावरणीय गुणवत्ता: हरित क्षेत्रों, जल संरक्षण और ऊर्जा दक्षता पर ध्यान।
इस प्रकार Ease of Doing Business और Ease of Living परस्पर पूरक अवधारणाएँ हैं।
बेहतर औद्योगिक निवेश रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है, जबकि बेहतर नागरिक सुविधाएँ उद्योगों के लिए कुशल कार्यबल को आकर्षित करने में सहायक हो सकती हैं।
74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 भारत में शहरी स्थानीय शासन की संवैधानिक व्यवस्था से संबंधित है।
इससे संविधान में भाग IX-A और 12वीं अनुसूची जोड़ी गई।
12वीं अनुसूची में शहरी नियोजन, भूमि उपयोग और भवन निर्माण के विनियमन जैसे विषय शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की स्थापना और संबंधित नियामकीय शक्तियों का प्रमुख आधार है।
इसके अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, भूमि उपयोग और निर्माण गतिविधियों का नियमन किया जाता है।
हालाँकि नगर निकायों तथा औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की शक्तियों एवं क्षेत्राधिकार में अंतर होता है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 — RERA
राज्य स्तर पर संबंधित अग्नि सुरक्षा और भवन निर्माण मानक
इन कानूनों का उद्देश्य विभिन्न स्तरों पर सुरक्षित, पारदर्शी और जिम्मेदार विकास सुनिश्चित करना है।
1. बहु-एजेंसी समन्वय का अभाव
औद्योगिक विकास प्राधिकरण, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय आवश्यक होता है।
कमजोर समन्वय से परियोजनाओं में विलंब हो सकता है।
2. भू-उपयोग परिवर्तन में प्रशासनिक बाधाएँ
भूमि उपयोग में परिवर्तन के लिए जटिल प्रक्रियाएँ तथा कई स्तरों पर अनुमति निवेशकों के लिए कठिनाइयाँ पैदा कर सकती हैं।
3. पर्यावरणीय स्वीकृति और निर्माण मानकों में तालमेल
भवन स्वीकृति को पर्यावरणीय नियमों से अलग नहीं देखा जा सकता।
जल निकासी, भूजल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण को निर्माण योजना में शामिल करना आवश्यक है।
4. डिजिटल प्रशासन की सीमाएँ
ऑनलाइन अनुमोदन प्रणालियों में तकनीकी त्रुटियाँ, डेटा के असंगत प्रारूप और कर्मचारियों के प्रशिक्षण का अभाव समस्या बन सकते हैं।
5. अनियोजित शहरी विस्तार
औद्योगिक विकास के आसपास अनियंत्रित आवासीय एवं वाणिज्यिक निर्माण से परिवहन, जलापूर्ति और पर्यावरण पर दबाव बढ़ सकता है।
भविष्य में उत्तर प्रदेश के औद्योगिक एवं शहरी विकास को टिकाऊ बनाने के लिए हरित भवन निर्माण को अधिक महत्व देना आवश्यक होगा।
ग्रीन बिल्डिंग (Green Building) ऐसी इमारत होती है, जिसके डिजाइन, निर्माण और उपयोग के दौरान ऊर्जा, पानी और अन्य संसाधनों की खपत को कम करने का प्रयास किया जाता है।
प्रमुख उपाय:
सौर ऊर्जा आधारित छत प्रणालियाँ।
वर्षा जल संचयन।
ऊर्जा दक्ष प्रकाश और वातानुकूलन।
अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण।
पर्याप्त प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन।
हरित आवरण तथा तापमान नियंत्रण।
विशेष ध्यान: ग्रीन बिल्डिंग तथा सोलर रूफटॉप को व्यापक रूप से अनिवार्य बनाने का सुझाव एक नीतिगत सिफारिश है। इसे नए विनियमों के अंतर्गत सभी भवनों पर लागू मौजूदा अनिवार्यता नहीं माना जाना चाहिए।
1. सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम
संबंधित विभागों की अनुमतियों के लिए अधिक प्रभावी डिजिटल एकीकृत व्यवस्था विकसित करना।
2. समयबद्ध अनुमोदन
भवन मानचित्र स्वीकृति और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित समयसीमा लागू करना।
3. GIS आधारित भूमि प्रबंधन
भू-उपयोग, औद्योगिक भूखंड और आधारभूत संरचना की डिजिटल निगरानी।
4. ग्रीन बिल्डिंग मानकों को बढ़ावा
भवन की प्रकृति तथा स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण और रूफटॉप सोलर से जुड़े मानक मजबूत करना।
5. जवाबदेह प्रशासन
ऑनलाइन आवेदन की स्थिति, पारदर्शी शुल्क व्यवस्था और शिकायत निवारण प्रणाली को प्रभावी बनाना।
UP Model Building Regulations — 2026
मंत्रिमंडलीय मंजूरी — 9 अक्टूबर 2026।
संबंधित अधिसूचना — 12 अक्टूबर 2026।
प्रमुख वैधानिक आधार — UP Industrial Area Development Act, 1976।
शहरी स्थानीय शासन — 74वाँ संविधान संशोधन।
शहरी नियोजन — 12वीं अनुसूची।
RERA अधिनियम — 2016।
प्रमुख अवधारणाएँ — Ease of Doing Business, Ease of Living, Green Buildings।
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति बढ़ाने के लिए नियामकीय सुधार, आधारभूत संरचना, पर्यावरणीय सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासन का समन्वय आवश्यक है।
केवल निर्माण अनुमति सरल बनाने से संतुलित विकास सुनिश्चित नहीं होगा। इसके लिए स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं, प्राकृतिक संसाधनों और दीर्घकालीन शहरी नियोजन को भी महत्व देना होगा।
“उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए नियामकीय सुधारों के साथ-साथ पारदर्शी, तकनीक-संचालित और पर्यावरण-संवेदनशील प्रशासन को मजबूत करना आवश्यक है।”

प्रतिवर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस (World Food Day) मनाया जाता है।
इसका उद्देश्य दुनिया में भूख, कुपोषण और खाद्य असुरक्षा की समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सभी लोगों के लिए पर्याप्त और पौष्टिक भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयासों को प्रोत्साहित करना है।
वर्ष 2026 की आधिकारिक थीम है:
“Innovate today. Nourish tomorrow.”
हिंदी अर्थ — आज नवाचार करें, कल को पोषित करें।
इस वर्ष का विषय कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में आधुनिक विज्ञान, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर केंद्रित है।
विश्व खाद्य दिवस की स्थापना का संबंध खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) से है।
FAO की स्थापना — 16 अक्टूबर 1945।
मुख्यालय — रोम, इटली।
विश्व खाद्य दिवस मनाने का निर्णय — 1979।
पहला विश्व खाद्य दिवस — 1981।
The State of Food Security and Nutrition in the World (SOFI) 2026 रिपोर्ट वैश्विक भूख, पोषण और स्वस्थ आहार की लागत से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।
यह रिपोर्ट FAO, IFAD, UNICEF, WFP और WHO द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाती है।
SOFI 2026 — प्रमुख वैश्विक आँकड़े
2025 में भूख से प्रभावित लोग
वैश्विक आबादी में भूख की अनुमानित हिस्सेदारी
स्वस्थ आहार का खर्च वहन न कर पाने वाले लोग
2025 में स्वस्थ आहार की औसत दैनिक लागत प्रति व्यक्ति
ये वर्ष 2025 की स्थिति पर आधारित SOFI 2026 के वैश्विक अनुमान हैं।
वैश्विक स्तर पर भूख में कुछ कमी दर्ज होने के बावजूद स्वस्थ और पौष्टिक आहार की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल पेट भरने के लिए भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि पौष्टिक, सुरक्षित और संतुलित भोजन सुनिश्चित करना भी है।
खाद्य सुरक्षा से संबंधित एक महत्वपूर्ण अवधारणा Hidden Hunger (छिपी हुई भूख) है।
सामान्य भूख (Hunger)
यह पर्याप्त भोजन अथवा ऊर्जा की लगातार कमी से संबंधित है।
इस स्थिति में व्यक्ति को आवश्यक कैलोरी नहीं मिल पाती, जिससे शारीरिक कमजोरी और स्वास्थ्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
छिपी हुई भूख (Hidden Hunger)
इसका अर्थ शरीर में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी होना है।
व्यक्ति पर्याप्त कैलोरी का सेवन कर सकता है, फिर भी उसमें विटामिन और खनिज तत्वों की कमी हो सकती है।
प्रमुख उदाहरण:
आयरन की कमी — एनीमिया का प्रमुख कारण।
आयोडीन की कमी — थायरॉयड संबंधी विकार।
विटामिन-A की कमी — दृष्टि संबंधी समस्याएँ।
जिंक की कमी — प्रतिरक्षा एवं शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव।
UPPCS Prelims के लिए: Hidden Hunger मुख्यतः सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) की कमी से संबंधित है।
संतुलित और विविधतापूर्ण आहार।
खाद्य पदार्थों का फोर्टिफिकेशन।
पोषण शिक्षा और जागरूकता।
स्थानीय पौष्टिक फसलों का उत्पादन।
मातृ एवं शिशु पोषण कार्यक्रमों को मजबूत करना।
भारत में कृषि उत्पादन के साथ-साथ Post-Harvest Losses (फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान) एक महत्वपूर्ण चुनौती है।
कटाई के बाद भंडारण, परिवहन, प्रसंस्करण और विपणन के विभिन्न चरणों में कृषि उत्पादों की मात्रा या गुणवत्ता को नुकसान पहुँच सकता है।
प्रमुख कारण:
1. अपर्याप्त भंडारण
उचित गोदामों और वैज्ञानिक भंडारण सुविधाओं की कमी से नमी, कीट तथा अन्य कारणों से नुकसान हो सकता है।
2. कमजोर कोल्ड चेन
फल, सब्जियाँ, दूध और अन्य शीघ्र खराब होने वाले कृषि उत्पादों को तापमान नियंत्रित व्यवस्था की आवश्यकता होती है।
3. परिवहन संबंधी समस्याएँ
खराब पैकिंग, लंबी परिवहन अवधि और अपर्याप्त लॉजिस्टिक्स सुविधाएँ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता प्रभावित कर सकती हैं।
4. प्रसंस्करण की कमी
खाद्य प्रसंस्करण सुविधाएँ कम होने पर अतिरिक्त उत्पादन का उपयोग सीमित हो सकता है।
वैज्ञानिक गोदाम एवं साइलो।
कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन का विस्तार।
ग्रामीण स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण।
किसान उत्पादक संगठन (FPO) को समर्थन।
डिजिटल आपूर्ति शृंखला प्रबंधन।
महत्वपूर्ण: भारत में सभी फसलों के लिए कटाई के बाद नुकसान की दर समान नहीं है। इसलिए किसी एक प्रतिशत को पूरे खाद्यान्न उत्पादन पर लागू करना सही नहीं होगा।
प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (PM-KUSUM) कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है।
इसका उद्देश्य किसानों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना तथा कृषि क्षेत्र में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करना है।
प्रमुख लाभ:
सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों का उपयोग।
सिंचाई के लिए ऊर्जा उपलब्धता में सुधार।
डीजल आधारित पंपों पर निर्भरता कम करने की संभावना।
कृषि क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा को प्रोत्साहन।
PM-KUSUM का संबंध नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय से है।
हालाँकि सौर पंपों के उपयोग के साथ भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने के लिए प्रभावी जल प्रबंधन भी आवश्यक है।
e-NAM (National Agriculture Market) एक डिजिटल कृषि विपणन मंच है।
यह देश की कृषि उपज मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने का प्रयास करता है।
इससे संबंधित प्रमुख उद्देश्य हैं:
कृषि उत्पादों के व्यापार में पारदर्शिता।
किसानों को बाजार संबंधी बेहतर जानकारी।
डिजिटल बोली और व्यापार की सुविधा।
कृषि बाजारों का अधिक प्रभावी एकीकरण।
कृषि उत्पादों के मूल्य निर्धारण में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा।
e-NAM का शुभारंभ 14 अप्रैल 2016 को किया गया था।
यह योजना कृषि बाजार सुधार तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
मोटे अनाज या मिलेट्स को भारत में श्री अन्न (Shree Anna) के रूप में प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इनमें बाजरा, ज्वार, रागी, कंगनी, कुटकी और अन्य छोटे अनाज शामिल हैं।
मिलेट्स की विभिन्न किस्मों में फाइबर, खनिज एवं अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।
विशेष रूप से रागी कैल्शियम के स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है।
कई मोटे अनाज अपेक्षाकृत कम पानी और चुनौतीपूर्ण जलवायु परिस्थितियों में उगाए जा सकते हैं।
इसलिए ये Climate-Resilient Agriculture (जलवायु-अनुकूल कृषि) के लिए उपयोगी विकल्प हो सकते हैं।
मिलेट्स का प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन किसानों के लिए नए बाजार अवसर पैदा कर सकता है।
संयुक्त राष्ट्र ने भारत के प्रस्ताव पर वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष (International Year of Millets) घोषित किया था।
| योजना | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|
| राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 | पात्र लाभार्थियों के लिए खाद्यान्न का कानूनी अधिकार |
| प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना | पात्र लाभार्थियों को खाद्यान्न सहायता |
| PM POSHAN | पात्र विद्यालयी बच्चों के पोषण में सुधार |
| पोषण अभियान | महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की चुनौती से निपटना |
| PM-KUSUM | कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन |
| e-NAM | डिजिटल कृषि विपणन |
| प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना | सिंचाई एवं जल उपयोग दक्षता में सुधार |
उत्तर प्रदेश भारत के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों में शामिल है।
राज्य में गेहूँ, धान, गन्ना, आलू और अनेक अन्य कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।
इसके बावजूद कृषि क्षेत्र के सामने कई चुनौतियाँ मौजूद हैं:
छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या।
भंडारण तथा विपणन संबंधी समस्याएँ।
जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा।
कुछ क्षेत्रों में भूजल पर बढ़ती निर्भरता।
ग्रामीण स्तर पर प्रसंस्करण सुविधाओं की आवश्यकता।
इन चुनौतियों का समाधान कृषि तकनीक, बेहतर बाजार संपर्क, खाद्य प्रसंस्करण तथा किसान समूहों की भागीदारी से किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों का विकास ग्रामीण रोजगार, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित कर सकता है।
अनुच्छेद 21 — जीवन का अधिकार
न्यायिक व्याख्या में गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार के अंतर्गत भोजन एवं पोषण सुरक्षा के महत्व को मान्यता दी गई है।
अनुच्छेद 47 — राज्य के नीति निदेशक तत्व
राज्य का कर्तव्य है कि वह पोषण स्तर और जीवन स्तर को ऊपर उठाने तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार का प्रयास करे।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
यह अधिनियम पात्र लाभार्थियों को निर्धारित खाद्यान्न प्रदान करने का वैधानिक ढाँचा स्थापित करता है।
मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: खाद्य सुरक्षा को संविधान के अनुच्छेद 21, अनुच्छेद 47 तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 से जोड़कर समझना चाहिए।
1. पोषण-केंद्रित कृषि: केवल अधिक उत्पादन के स्थान पर पोषक तत्वों से भरपूर और विविध फसलों को बढ़ावा देना।
2. डिजिटल कृषि: छोटे किसानों को मौसम, बाजार, सिंचाई और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराना।
3. फसल नुकसान में कमी: आधुनिक गोदाम, कोल्ड चेन और खाद्य प्रसंस्करण का विस्तार।
4. महिला किसानों का सशक्तीकरण: कृषि संसाधनों, प्रशिक्षण और वित्तीय सेवाओं तक बेहतर पहुँच।
5. टिकाऊ जल प्रबंधन: सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन और कम जल की आवश्यकता वाली फसलों का प्रोत्साहन।
6. पौष्टिक भोजन की उपलब्धता: सार्वजनिक वितरण, पोषण कार्यक्रम और कृषि विविधीकरण के बीच समन्वय।
विश्व खाद्य दिवस — 16 अक्टूबर।
FAO की स्थापना — 16 अक्टूबर 1945।
FAO मुख्यालय — रोम, इटली।
पहला विश्व खाद्य दिवस — 1981।
2026 की थीम — Innovate today. Nourish tomorrow.
SOFI 2026 — खाद्य सुरक्षा और पोषण की वैश्विक रिपोर्ट।
विश्व में 2025 में भूख से प्रभावित लोग — लगभग 64.5 करोड़।
स्वस्थ आहार का खर्च वहन न कर पाने वाले लोग — लगभग 2.69 अरब।
Hidden Hunger — सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी।
e-NAM का शुभारंभ — 14 अप्रैल 2016।
अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष — 2023।
सतत विकास लक्ष्य 2 — Zero Hunger।
विश्व खाद्य दिवस 2026 यह संदेश देता है कि भविष्य की खाद्य सुरक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने से सुनिश्चित नहीं होगी। इसके लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, समावेशी कृषि बाजार, पोषण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा।
“कृषि क्षेत्र में नवाचार का लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुँचाना आवश्यक है। तकनीक, पौष्टिक आहार की उपलब्धता और टिकाऊ कृषि के समन्वय से ही SDG-2 अर्थात शून्य भूख के लक्ष्य की दिशा में वास्तविक प्रगति संभव है।”
| महत्वपूर्ण विषय | परीक्षा उपयोगी तथ्य |
|---|---|
| भारत के रामसर स्थल | 103 |
| नवीनतम रामसर स्थल | सौज झील और सुखना आर्द्रभूमि |
| सौज झील | मैनपुरी, उत्तर प्रदेश |
| सौज झील की रामसर संख्या | 2603 |
| सुखना की रामसर संख्या | 2602 |
| रामसर कन्वेंशन | 1971 |
| भारत में रामसर कन्वेंशन प्रभावी | 1982 |
| रामसर सचिवालय | ग्लैंड, स्विट्जरलैंड |
| UP Model Building Regulations | 2026 |
| संबंधित प्रमुख अधिनियम | UP Industrial Area Development Act, 1976 |
| शहरी स्थानीय शासन | 74वाँ संविधान संशोधन |
| विश्व खाद्य दिवस | 16 अक्टूबर |
| विश्व खाद्य दिवस 2026 थीम | Innovate today. Nourish tomorrow. |
| SOFI 2026 में वैश्विक भूख का अनुमान | 64.5 करोड़ |
| Hidden Hunger | सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी |
| FAO मुख्यालय | रोम, इटली |
| खाद्य सुरक्षा से संबंधित SDG | SDG-2 |
Question: (QID-1)
अक्टूबर 2026 में घोषित नए रामसर स्थलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
सौज झील उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में स्थित है।
सुखना आर्द्रभूमि मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग से संबंधित है।
सौज झील का रामसर स्थल संख्या 2602 है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 3 (d) 1, 2 और 3
Answer : a
Solution : कथन 1 और 2 सही हैं। सौज झील मैनपुरी में स्थित है और सुखना आर्द्रभूमि मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी मार्ग से संबंधित है। सौज झील की रामसर संख्या 2603 है।
Question: (QID-2)
उत्तर प्रदेश के Model Building Regulations, 2026 के प्रमुख वैधानिक आधार के रूप में निम्नलिखित में से कौन-सा अधिनियम संबंधित है?
(a) उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 (b) उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 (c) भारतीय पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 (d) राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956
Answer : b
Solution : उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम, 1976 राज्य में औद्योगिक विकास प्राधिकरणों और उनके नियामकीय अधिकारों से संबंधित प्रमुख कानून है।
Question: (QID-3)
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
Hidden Hunger का संबंध केवल कैलोरी की कमी से है।
SOFI 2026 का प्रमुख विषय स्वस्थ आहार की उच्च लागत को समझना और उसका समाधान करना है।
SDG-2 का संबंध भूखमरी समाप्त करने से है।
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(a) केवल 1 और 2 (b) केवल 1 और 3 (c) केवल 2 और 3 (d) 1, 2 और 3
Answer : c
Solution : पहला कथन गलत है क्योंकि Hidden Hunger मुख्यतः सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से संबंधित है। दूसरा और तीसरा कथन सही हैं।
प्रश्न 1. पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (150 शब्द)
उत्तर प्रदेश में आर्द्रभूमियों के पारिस्थितिक महत्व की व्याख्या करते हुए उनके संरक्षण के समक्ष प्रमुख चुनौतियों और समाधान के उपायों का विश्लेषण कीजिए।
प्रश्न 2. उत्तर प्रदेश विशेष एवं अर्थव्यवस्था (150 शब्द)
उत्तर प्रदेश में Model Building Regulations, 2026 किस प्रकार औद्योगिक विकास, Ease of Doing Business तथा नियोजित शहरीकरण को प्रभावित कर सकते हैं? विवेचना कीजिए।
प्रश्न 3. कृषि एवं सामाजिक मुद्दे (150 शब्द)
विश्व खाद्य दिवस 2026 की थीम के आलोक में भारत में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में तकनीकी नवाचार, कृषि विविधीकरण तथा खाद्य भंडारण के महत्व का परीक्षण कीजिए।
भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में समसामयिक घटनाओं से जुड़े प्रश्न अब केवल तारीख, स्थान या व्यक्तियों के नाम तक सीमित नहीं रहते। एक समाचार से भूगोल, संविधान, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रशासनिक सुधार जैसे कई विषयों पर प्रश्न तैयार किए जा सकते हैं।
आज के Current Affairs में हम चार महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन करेंगे:
लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाएँ और तीसरा सामरिक सड़क मार्ग।
लंबित न्यायिक मामलों के समाधान के लिए 100 जिलों पर विशेष पहल।
RDI योजना का विस्तार और भारत में अनुसंधान निवेश की स्थिति।
लखनऊ में मिशन कर्मयोगी की क्षेत्रीय कार्यशाला।
हर घटना के साथ महत्वपूर्ण तथ्य, उसका व्यापक महत्व और UPSC/UPPCS Mains के लिए विश्लेषण भी दिया गया है।
भारत सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में लगभग ₹3,350 करोड़ की पाँच विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं लोकार्पण का कार्यक्रम निर्धारित किया।

ये परियोजनाएँ सड़क संपर्क, हवाई यातायात, जलविद्युत, जल संरक्षण और पुरातात्त्विक विरासत के संरक्षण से संबंधित हैं।
| परियोजना | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| लेह हवाई अड्डे का नया यात्री टर्मिनल | ₹640 करोड़ की लागत, सालाना 35 लाख यात्रियों की क्षमता |
| निम्मू–पदुम–दारचा सड़क | 298 किमी लंबा वैकल्पिक सामरिक मार्ग |
| हानू लघु जलविद्युत परियोजना एवं दाह–हानू–खालसी ट्रांसमिशन लाइन | 9 मेगावाट जलविद्युत एवं 66 kV विद्युत लाइन |
| पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण |
| प्रोजेक्ट हिम सरोवर | 40 गाँवों में 40 जल निकाय |
निम्मू–पदुम–दारचा (NPD) मार्ग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया गया है। यह हिमाचल प्रदेश के दारचा को जांस्कर घाटी के रास्ते लद्दाख के निम्मू से जोड़ता है।
यह मार्ग लद्दाख को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाला तीसरा सड़क अक्ष (Third Axis) है।
लद्दाख के तीन प्रमुख सड़क संपर्क मार्ग हैं:
श्रीनगर–कारगिल–लेह मार्ग
मनाली–लेह मार्ग
निम्मू–पदुम–दारचा मार्ग
पहले दो मार्गों के अतिरिक्त तीसरा विकल्प उपलब्ध होने से किसी एक सड़क के बाधित होने पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग का उपयोग किया जा सकता है।
इसका महत्व विशेष रूप से तीन दृष्टियों से है:
राष्ट्रीय सुरक्षा: सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद की आवाजाही के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होता है।
रणनीतिक लचीलापन: पारंपरिक मार्गों पर निर्भरता घटती है। इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति कुछ सैन्य संचालन परिस्थितियों में रणनीतिक लाभ दे सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह शत्रु की निगरानी से सुरक्षित मानना उचित नहीं है।
स्थानीय विकास: जांस्कर घाटी के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और पर्यटन से बेहतर संपर्क मिल सकता है।
NPD मार्ग पर स्थित शिंकू ला दर्रे के नीचे लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग की परियोजना है।
इसका उद्देश्य सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण होने वाली संपर्क संबंधी कठिनाइयों को कम करना और पूरे वर्ष सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।
महत्वपूर्ण: सुरंग के पूरा होने पर All-Weather Connectivity की क्षमता विकसित होगी। वर्तमान सड़क को बिना इस शर्त के पूर्णतः बारहमासी घोषित नहीं करना चाहिए।
Petroglyphs (शैलोत्कीर्ण चित्र) प्राचीन चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियाँ, प्रतीक और चित्र होते हैं।
भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की स्थापना लद्दाख के सिंधु घाट, लेह में की गई है।
लद्दाख की जांस्कर और नुब्रा जैसी घाटियों में विभिन्न कालखंडों की शैलकला के प्रमाण मिले हैं।
पुरातात्त्विक अध्ययनों में कुछ शैलचित्रों को कांस्य युग एवं लौह युग से संबंधित माना गया है। इनमें पशुओं, शिकार, मानव आकृतियों और प्रतीकों का चित्रण मिलता है।
इनमें से कुछ कलात्मक शैलियों में मध्य एशिया, तिब्बत और साइबेरियाई क्षेत्रों की शैलकला से समानताएँ भी देखी गई हैं, जो प्राचीन सांस्कृतिक संपर्कों के अध्ययन में उपयोगी हैं।
| तथ्य | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| NPD मार्ग | 298 किमी |
| निर्माण एजेंसी | BRO |
| तीसरा सड़क अक्ष | निम्मू–पदुम–दारचा |
| शिंकू ला सुरंग | लगभग 4.1 किमी, ट्विन-ट्यूब परियोजना |
| पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह |
| हानू जलविद्युत परियोजना | 9 मेगावाट |
| प्रोजेक्ट हिम सरोवर | 40 गाँवों में 40 जल निकाय |
Prelims Focus: BRO, शिंकू ला दर्रा, जांस्कर घाटी, शैलचित्र, कांस्य युग, लौह युग।
Mains GS-III: सीमावर्ती अवसंरचना का राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव।
Mains GS-I: लद्दाख की शैलकला प्राचीन भारत और मध्य एशिया के सांस्कृतिक संपर्कों का अध्ययन करने में किस प्रकार सहायक है?
भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या न्याय तक समयबद्ध पहुँच के सामने एक प्रमुख चुनौती है।
14 अक्टूबर 2026 को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 100 ऐसे न्यायिक जिलों पर केंद्रित अनुसंधान-आधारित पहल की जानकारी दी, जहाँ लंबित मामलों का बोझ अधिक है।
इस पहल में 16 राज्यों के 19 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) की भागीदारी की व्यवस्था की गई है।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार देशभर के न्यायालयों में 5.8 करोड़ से अधिक मामले लंबित थे और चुने गए 100 जिलों में जिला न्यायालयों के लंबित मामलों का आधे से अधिक हिस्सा केंद्रित था।
National Judicial Data Grid (NJDG) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से न्यायालयों में दर्ज, निस्तारित और लंबित मामलों के आँकड़ों का अध्ययन किया जा सकता है।
इसके माध्यम से निम्न जानकारी प्राप्त होती है:
दीवानी एवं आपराधिक मामलों की स्थिति
लंबित मामलों की अवधि
राज्य एवं जिलावार आँकड़े
मामलों के निस्तारण की स्थिति
न्यायिक विलंब के संभावित कारण
भारत सरकार द्वारा e-Courts Project के तीसरे चरण (2023–2027) को ₹7,210 करोड़ के वित्तीय प्रावधान के साथ स्वीकृति दी गई थी।
इस चरण के प्रमुख उद्देश्य हैं:
न्यायालयों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण।
ई-फाइलिंग और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विस्तार।
विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक प्रणालियों के बीच डिजिटल समन्वय।
पारदर्शिता एवं न्यायिक सेवाओं की पहुँच में सुधार।
विशेष तथ्य: डिजिटलीकरण का उद्देश्य मामलों के प्रबंधन को बेहतर बनाना है, लेकिन केवल तकनीक के उपयोग से सभी लंबित मामलों का समाधान अपने आप नहीं हो सकता।
न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ घटाने के लिए Alternative Dispute Resolution (ADR) की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ADR के प्रमुख तरीकों में मध्यस्थता (Mediation), सुलह (Conciliation), पंचाट (Arbitration) और लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
मध्यस्थता अधिनियम, 2023 का उद्देश्य विवादों के आपसी समाधान के लिए एक विधिक ढाँचा उपलब्ध कराना है।
इसके अंतर्गत मध्यस्थता, मध्यस्थता समझौते और संस्थागत मध्यस्थता जैसे विषयों के प्रावधान हैं। अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की स्थिति को संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार समझना चाहिए।
न्यायिक विलंब की समस्या केवल तकनीक की कमी से उत्पन्न नहीं होती। इसके अनेक संरचनात्मक कारण हैं।
न्यायिक रिक्तियाँ: न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों की कमी से मामलों के निस्तारण में कठिनाई हो सकती है।
सरकारी मुकदमेबाजी: सरकार स्वयं अनेक मामलों में वादी या प्रतिवादी होती है।
बार-बार स्थगन: सुनवाई का स्थगित होना मामलों की अवधि बढ़ा सकता है।
प्रक्रियागत जटिलताएँ: समन की तामील, साक्ष्य और दस्तावेजों से संबंधित प्रक्रियाओं में समय लगता है।
असमान बुनियादी सुविधाएँ: विभिन्न न्यायालयों के बीच संसाधनों और तकनीकी क्षमताओं में अंतर भी परिणाम प्रभावित करता है।
इसलिए न्यायिक सुधार में डिजिटल तकनीक + न्यायिक मानव संसाधन + प्रक्रियागत सुधार + ADR को एक साथ अपनाना आवश्यक है।
| अनुच्छेद | संबंधित विषय |
|---|---|
| अनुच्छेद 14 | विधि के समक्ष समानता |
| अनुच्छेद 21 | जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता; न्यायिक व्याख्या में शीघ्र न्याय |
| अनुच्छेद 39A | समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता |
| अनुच्छेद 50 | न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करना |
चिह्नित न्यायिक जिले
संबद्ध NLUs
लंबित मामलों का सरकारी संदर्भ आँकड़ा
e-Courts Phase III
मुख्य शब्द: NJDG, e-Courts Phase III, ADR, Mediation Act 2023, अनुच्छेद 39A।
Prelims Focus: राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड, e-Courts, मध्यस्थता अधिनियम, अनुच्छेद 21 एवं 39A।
Mains GS-II: न्यायिक लंबित मामलों की संरचनात्मक समस्या और न्याय तक समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करने के उपाय।
भारत सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को Research, Development and Innovation (RDI) Scheme के अंतर्गत नए तकनीकी क्षेत्रों को शामिल करने की जानकारी दी।
इस निर्णय के अनुसार Advanced Chemicals, Petrochemicals and Material Technologies को वित्तीय सहायता के अतिरिक्त पात्र क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया।

यह विस्तार 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है। निर्णय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के प्रस्ताव पर लिया गया।
RDI का पूरा नाम Research, Development and Innovation है।
इसका उद्देश्य विशेष रूप से निजी क्षेत्र और तकनीक आधारित उद्यमों को अनुसंधान, नई प्रौद्योगिकी और नवाचार में अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
केंद्र सरकार की RDI योजना के लिए ₹1 लाख करोड़ का वित्तीय प्रावधान घोषित किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य दीर्घकालिक अनुसंधान और तकनीकी विकास के लिए वित्तपोषण का समर्थन करना है।
Anusandhan National Research Foundation (ANRF) की स्थापना ANRF Act, 2023 के अंतर्गत की गई।
यह संस्थान भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को रणनीतिक दिशा देने के लिए बनाया गया है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों में शोध को प्रोत्साहन।
उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच सहयोग।
प्रतिस्पर्धी अनुसंधान वित्तपोषण को बढ़ावा।
वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक और औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ना।
ANRF के लिए 2023–2028 की अवधि में ₹50,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
ध्यान दें: ANRF और RDI योजना एक ही संस्था या योजना नहीं हैं। दोनों भारत के व्यापक अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र के अलग-अलग, लेकिन परस्पर पूरक घटक हैं।
भारत के लिए अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाना एक महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी चुनौती है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में GDP के अनुपात में R&D व्यय लगभग 0.64% बताया गया था।
हालाँकि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जुलाई 2026 में प्रस्तुत Research & Development Statistics 2025–26 के अनुसार, 2023–24 के लिए GERD/GDP अनुपात 0.84% दर्ज किया गया।
इसलिए परीक्षा की तैयारी में आँकड़े का वर्ष और उसका स्रोत ध्यान में रखना आवश्यक है।
भारत में R&D व्यय: GDP के प्रतिशत के रूप में
0%0.25%0.5%0.75%1%2019–202020–212021–222022–232023–24
नवीनतम प्रकाशित श्रृंखला में 2023–24 का अनुपात 0.84% है।
पहला कारण — अनुसंधान निवेश: सार्वजनिक वित्तपोषण के साथ निजी कंपनियों का निवेश जुड़ने से उपलब्ध संसाधन बढ़ सकते हैं।
दूसरा कारण — तकनीक का व्यावसायिक उपयोग: प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को उपयोगी उत्पादों में बदलना आसान हो सकता है।
तीसरा कारण — आयात निर्भरता: उन्नत सामग्री, औद्योगिक रसायन और अन्य जटिल प्रौद्योगिकियों के घरेलू विकास को सहायता मिल सकती है।
चौथा कारण — रोजगार एवं स्टार्टअप: अनुसंधान आधारित उद्यमिता और उच्च कौशल वाले रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
| आधार | RDI योजना | ANRF |
|---|---|---|
| मुख्य प्रकृति | वित्तपोषण एवं नवाचार समर्थन | अनुसंधान को रणनीतिक दिशा देने वाली संस्था |
| प्रमुख लक्ष्य | तकनीकी विकास एवं औद्योगिक R&D | व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान |
| प्रमुख फोकस | उन्नत प्रौद्योगिकी, निजी क्षेत्र की भागीदारी | शोध संस्थान, विश्वविद्यालय एवं उद्योग सहयोग |
| संदर्भ राशि | ₹1 लाख करोड़ | ₹50,000 करोड़ का 2023–28 लक्ष्य |
RDI: Research, Development and Innovation
ANRF: Anusandhan National Research Foundation
ANRF Act: 2023
RDI योजना का वित्तीय प्रावधान: ₹1 लाख करोड़
नए पात्र क्षेत्र: Advanced Chemicals, Petrochemicals and Material Technologies
विस्तार प्रभावी: 8 अक्टूबर 2026
GERD/GDP: DST की प्रकाशित 2023–24 श्रृंखला में 0.84%
Prelims Focus: ANRF, DST, RDI Scheme, GERD, औद्योगिक अनुसंधान।
Mains GS-III: भारत में R&D निवेश, निजी क्षेत्र की भूमिका और तकनीकी आत्मनिर्भरता।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 23–24 अक्टूबर 2026 को सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण से संबंधित तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा की गई है।
यह कार्यक्रम साधना शृंखला 2026 (Sādhana Shrinkhla) के अंतर्गत क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा आयोजित किया जाएगा।

कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक आधुनिक, प्रभावी और दक्षता-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित करना है।
Mission Karmayogi भारत सरकार का राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
इसे सितंबर 2020 में प्रारंभ किया गया था।
इसका सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है:
प्रशासनिक सुधार का प्रमुख सिद्धांत
Rule-Based
Role-Based
नियम-आधारित से भूमिका-आधारित प्रशासन
इसका अर्थ है कि सरकारी कर्मचारियों को केवल सामान्य नियमों की जानकारी देने के बजाय उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों और कार्यों के लिए आवश्यक क्षमताएँ विकसित की जाएँ।
iGOT Karmayogi एक डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी कर्मचारी विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।
इसमें विशेष रूप से तीन प्रकार की दक्षताओं को विकसित करने पर जोर दिया जाता है:
Domain Competencies: संबंधित विभाग एवं कार्यक्षेत्र का ज्ञान।
Functional Competencies: प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्य करने की क्षमता।
Behavioural Competencies: नेतृत्व, संवाद, नैतिकता और नागरिक-केंद्रित व्यवहार।
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में भी iGOT Karmayogi आधारित प्रशिक्षण को अपनाया जा रहा है।
राज्य की विभिन्न आधिकारिक जिला वेबसाइटों पर सरकारी कर्मचारियों के पंजीकरण और प्रशिक्षण के लिए iGOT Karmayogi Portal की जानकारी उपलब्ध है।
सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने से संबंधित निर्देशों की जानकारी भी सामने आई थी। महत्वपूर्ण तथ्यात्मक सावधानी: उत्तर प्रदेश में iGOT Karmayogi का उपयोग प्रमाणित है, लेकिन स्वतंत्र आधिकारिक प्लेटफॉर्म के रूप में 'Karmayogi UP' नाम की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए यहाँ इसे अलग राज्य पोर्टल बताने के बजाय मिशन कर्मयोगी के राज्यस्तरीय क्रियान्वयन के रूप में समझना सही होगा।
साधना शृंखला सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण से संबंधित क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं की श्रृंखला है।
इसका विस्तृत नाम Strengthening Adaptive Development and Humane Aptitude for National Advancement है।
| क्षेत्र | आयोजन स्थल | तारीख |
|---|---|---|
| दक्षिणी क्षेत्र | विजयवाड़ा | 29–30 सितंबर 2026 |
| पूर्वोत्तर क्षेत्र | गुवाहाटी | अक्टूबर 2026 |
| उत्तरी क्षेत्र | लखनऊ | 23–24 अक्टूबर 2026 |
| पश्चिमी क्षेत्र | पुणे | नवंबर 2026, प्रस्तावित |
प्रशिक्षण की गुणवत्ता: अधिकारियों की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
जवाबदेही: कार्य प्रदर्शन और क्षमता विकास के बीच संबंध मजबूत किया जा सकता है।
डिजिटल गवर्नेंस: तकनीकी प्रशिक्षण से सरकारी सेवाओं की दक्षता बढ़ सकती है।
नागरिक-केंद्रित प्रशासन: कर्मचारियों को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सेवा देने के लिए तैयार किया जा सकता है।
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| प्रारंभ | सितंबर 2020 |
| पूरा नाम | National Programme for Civil Services Capacity Building |
| प्रमुख अवधारणा | Rule-Based से Role-Based |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म | iGOT Karmayogi |
| संबंधित संस्था | Capacity Building Commission |
| विशेष प्रयोजन कंपनी | Karmayogi Bharat |
| कार्यशाला | साधना शृंखला 2026 |
| आयोजन स्थल | लखनऊ |
| तारीख | 23–24 अक्टूबर 2026 |
Prelims Focus: मिशन कर्मयोगी, CBC, iGOT Karmayogi, Rule-Based से Role-Based प्रशासन।
Mains GS-II: सिविल सेवा सुधार, प्रशासनिक दक्षता, क्षमता निर्माण और सुशासन।
| विषय | सबसे महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| लद्दाख विकास परियोजनाएँ | लगभग ₹3,350 करोड़ |
| NPD मार्ग | लद्दाख का तीसरा सड़क अक्ष |
| NPD सड़क की लंबाई | 298 किमी |
| शिंकू ला सुरंग परियोजना | लगभग 4.1 किमी |
| पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह |
| न्यायिक सुधार | 100 न्यायिक जिले |
| राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय | 19 |
| न्यायिक मामलों के लिए डेटा प्लेटफॉर्म | NJDG |
| e-Courts Phase III | 2023–2027 |
| मध्यस्थता संबंधी कानून | Mediation Act, 2023 |
| RDI योजना | ₹1 लाख करोड़ |
| ANRF | ANRF Act, 2023 |
| R&D व्यय | 2023–24 में GDP का 0.84% |
| मिशन कर्मयोगी | Rule-Based से Role-Based |
| डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म | iGOT Karmayogi |
| साधना शृंखला कार्यशाला | 23–24 अक्टूबर, लखनऊ |
निम्मू–पदुम–दारचा (NPD) मार्ग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
यह लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला तीसरा प्रमुख सड़क अक्ष है।
यह मार्ग जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है।
शिंकू ला सुरंग परियोजना का उद्देश्य पूरे वर्ष सड़क संपर्क की सुविधा विकसित करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक (b) केवल दो (c) सभी तीन (d) कोई भी नहीं
Answer : c
Solution : तीनों कथन सही हैं। NPD सड़क लद्दाख के लिए तीसरा प्रमुख सड़क संपर्क मार्ग है। यह हिमाचल प्रदेश के दारचा को जांस्कर घाटी के रास्ते निम्मू से जोड़ती है। शिंकू ला सुरंग परियोजना का उद्देश्य भारी बर्फबारी के दौरान भी संपर्क बनाए रखने की क्षमता विकसित करना है। सुरंग परियोजना की पूर्णता और मौजूदा सड़क की स्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए—
| पहल/संस्था | संबंधित उद्देश्य |
|---|---|
| 1. NJDG | न्यायिक मामलों के आँकड़ों का प्रबंधन |
| 2. ANRF | अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन |
| 3. iGOT Karmayogi | सरकारी कर्मचारियों का डिजिटल प्रशिक्षण |
| 4. BRO | वैकल्पिक विवाद समाधान |
कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल एक (b) केवल दो (c) सभी चार (d) केवल तीन
Answer : d
Solution : युग्म 1, 2 और 3 सही हैं। NJDG न्यायिक आँकड़ों का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ANRF अनुसंधान एवं नवाचार को रणनीतिक समर्थन देता है। iGOT Karmayogi सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण से संबंधित है। चौथा युग्म गलत है, क्योंकि BRO का संबंध सड़क एवं सामरिक अवसंरचना निर्माण से है, न कि वैकल्पिक विवाद समाधान से।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के उद्देश्य का सर्वाधिक उपयुक्त वर्णन करता है?
(a) विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता संबंधी विधिक ढाँचा उपलब्ध कराना (b) सभी दीवानी न्यायालयों को समाप्त करना (c) केवल आपराधिक अपीलों के निस्तारण के लिए विशेष न्यायालय स्थापित करना (d) उच्च न्यायालयों को प्रशासनिक रूप से राज्य सरकार के अधीन करना
Answer : a
Solution : मध्यस्थता अधिनियम, 2023 विवादों के मध्यस्थता द्वारा समाधान के लिए विधिक ढाँचे से संबंधित है। मध्यस्थता में एक निष्पक्ष मध्यस्थ पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने में सहायता करता है। यह न्यायालयों का स्थान पूरी तरह नहीं लेती, बल्कि वैकल्पिक विवाद समाधान का एक माध्यम है।
मिशन कर्मयोगी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
इसका प्रमुख उद्देश्य नियम-आधारित से भूमिका-आधारित क्षमता निर्माण की ओर बढ़ना है।
iGOT Karmayogi सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल प्रशिक्षण से संबंधित है।
Capacity Building Commission मिशन कर्मयोगी के संस्थागत ढाँचे का हिस्सा है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक (b) सभी तीन (c) केवल दो (d) कोई भी नहीं
Answer : b
Solution : तीनों कथन सही हैं। मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों की भूमिकाओं के अनुरूप आवश्यक दक्षताओं को विकसित करने पर केंद्रित है। iGOT Karmayogi इसका डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म है। Capacity Building Commission मिशन के अंतर्गत क्षमता निर्माण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
ANRF की स्थापना ANRF Act, 2023 के अंतर्गत की गई है।
अक्टूबर 2026 में उन्नत रसायन और सामग्री प्रौद्योगिकियों को RDI योजना के अतिरिक्त पात्र क्षेत्रों में शामिल किया गया।
ANRF और RDI योजना एक ही कानूनी संस्था हैं।
सही कथनों का चयन कीजिए।
(a) केवल 1 और 3 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 2 (d) 1, 2 और 3
Answer : c
Solution : कथन 1 और 2 सही हैं। ANRF को अनुसंधान एवं नवाचार को रणनीतिक दिशा देने के लिए स्थापित किया गया है। RDI योजना के अंतर्गत उन्नत रसायन, पेट्रोकेमिकल्स एवं सामग्री प्रौद्योगिकी को अतिरिक्त पात्र क्षेत्र बनाया गया है। कथन 3 गलत है, क्योंकि ANRF और RDI योजना अलग-अलग संस्थागत एवं वित्तपोषण व्यवस्थाएँ हैं।
प्रश्न 1. (GS-III, 150 शब्द)
भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में वैकल्पिक सड़क मार्गों का विकास केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण साधन है। लद्दाख के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: सामरिक संपर्क, रसद व्यवस्था, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पारिस्थितिक चुनौतियाँ।
प्रश्न 2. (GS-II, 250 शब्द)
न्यायिक प्रणाली में e-Courts और मध्यस्थता जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार के बावजूद भारत में लंबित मामलों की संख्या अधिक क्यों बनी हुई है? न्यायिक सुधारों की उपलब्धियों एवं सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: न्यायिक रिक्तियाँ, प्रक्रियागत विलंब, सरकारी मुकदमेबाजी, डिजिटल असमानता, ADR की सीमाएँ, न्यायिक प्रबंधन।
प्रश्न 3. (GS-III, 150 शब्द)
भारत में अनुसंधान एवं विकास के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी क्यों आवश्यक है? RDI योजना तथा ANRF के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: GERD, तकनीकी आत्मनिर्भरता, विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग, अनुसंधान वित्तपोषण, नवाचार आधारित उद्योग।
प्रश्न 4. (GS-II, 150 शब्द)
मिशन कर्मयोगी का नियम-आधारित से भूमिका-आधारित प्रशासन की ओर परिवर्तन भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को किस प्रकार अधिक प्रभावी बना सकता है?
उत्तर के प्रमुख बिंदु: दक्षता आधारित प्रशिक्षण, iGOT Karmayogi, जवाबदेही, कार्य प्रदर्शन, नागरिक-केंद्रित प्रशासन।
15 अक्टूबर 2026 के Current Affairs से चार महत्वपूर्ण विषय उभरकर सामने आते हैं।
पहला, लद्दाख की सामरिक परियोजनाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ क्षेत्रीय विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी उदाहरण हैं।
दूसरा, न्यायिक सुधारों के लिए केवल तकनीक का उपयोग पर्याप्त नहीं है। इसके साथ मानव संसाधन, प्रक्रियागत सुधार और वैकल्पिक विवाद समाधान को भी मजबूत करना आवश्यक है।
तीसरा, भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अनुसंधान निवेश, ANRF, RDI वित्तपोषण और निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण हैं।
चौथा, मिशन कर्मयोगी प्रशासन को नियम-आधारित व्यवस्था से अधिक दक्षता और भूमिका-केंद्रित प्रणाली की ओर ले जाने का प्रयास है।
UPSC और UPPCS की तैयारी में Current Affairs को केवल तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि Static GK, संविधान, अर्थव्यवस्था और Mains Analysis के साथ जोड़कर पढ़ना अधिक उपयोगी है।
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14 अक्टूबर 2026 करेंट अफेयर्स | UPSC, UPPCS एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष विश्लेषण
कल्पना कीजिए कि किसी भारतीय युवक को विदेश में अच्छी सैलरी वाली नौकरी का प्रस्ताव मिलता है। वह बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश पहुँचता है, लेकिन वहाँ उसका पासपोर्ट छीन लिया जाता है और उसे साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता है।
यह केवल काल्पनिक स्थिति नहीं है।
6 मई 2026 को भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी दी थी, जो भारतीय नागरिकों को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजता था।
जाँच में सामने आया कि पीड़ितों को मुख्यतः म्यांमार और कंबोडिया के साइबर स्कैम केंद्रों में पहुँचाया जाता था, जहाँ उनसे जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी कराई जाती थी।
इस प्रकार के अपराध को सामान्यतः Cyber Slavery (साइबर गुलामी) कहा जाता है।
अब सवाल उठता है कि जब अपराधियों का नेटवर्क अनेक देशों में फैला हो, तो क्या कोई एक देश अकेले इसे रोक सकता है?
इसी प्रकार की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों की पृष्ठभूमि में 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में BIMSTEC की पहली गृह मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में सात सदस्य देशों ने दिल्ली घोषणा-पत्र (Delhi Declaration) अपनाया, जिसमें आतंकवाद, मानव तस्करी, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराधों के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई।
इस घटना का महत्व केवल अंतरराष्ट्रीय संबंधों तक सीमित नहीं है। UPSC और UPPCS की प्रारंभिक परीक्षा में संगठन से जुड़े तथ्य तथा मुख्य परीक्षा में क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत की विदेश नीति से संबंधित प्रश्न बन सकते हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आयोजन | प्रथम BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक |
| तारीख | 13 अक्टूबर 2026 |
| स्थान | नई दिल्ली, भारत |
| अध्यक्षता | केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह |
| भाग लेने वाले सदस्य देश | 7 |
| प्रमुख उपलब्धि | दिल्ली घोषणा-पत्र को अपनाना |
| मुख्य विषय | आतंकवाद, साइबर अपराध, मानव तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी एवं क्षेत्रीय सुरक्षा |
| सहयोग का स्वरूप | सूचना साझाकरण, कानूनी सहयोग, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण |
यह BIMSTEC की पहली गृह मंत्रिस्तरीय बैठक थी, न कि संगठन का पहला शिखर सम्मेलन।
बैठक ने क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को गृह मंत्रियों के स्तर पर एक नया संस्थागत मंच प्रदान किया।
दिल्ली घोषणा-पत्र में सदस्य देशों ने एक अधिक सुरक्षित, सुदृढ़, परस्पर जुड़ा हुआ और समृद्ध BIMSTEC क्षेत्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
BIMSTEC का पूरा नाम Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation है।
यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के सात देशों का क्षेत्रीय सहयोग संगठन है।
इसका उद्देश्य व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, सुरक्षा, कृषि, विज्ञान, पर्यावरण और सामाजिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच समन्वय बढ़ाना है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | 6 जून 1997 |
| स्थापना का आधार | बैंकॉक घोषणा-पत्र |
| प्रारंभिक नाम | BIST-EC |
| सदस्य देशों की संख्या | 7 |
| सचिवालय | ढाका, बांग्लादेश |
| BIMSTEC चार्टर अपनाया गया | 30 मार्च 2022 |
| BIMSTEC चार्टर लागू हुआ | 20 मई 2024 |
| संगठन का भौगोलिक महत्व | दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क |
BIMSTEC की शुरुआत भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और थाईलैंड के साथ हुई थी।
दिसंबर 1997 में म्यांमार तथा फरवरी 2004 में नेपाल और भूटान इसमें शामिल हुए।
BIMSTEC के सात सदस्य हैं:
थाईलैंड (Thailand)

| अक्षर | देश |
|---|---|
| M | Myanmar – म्यांमार |
| B | Bangladesh – बांग्लादेश |
| B | Bhutan – भूटान |
| S | Sri Lanka – श्रीलंका |
| N | Nepal – नेपाल |
| I | India – भारत |
| T | Thailand – थाईलैंड |
यह केवल याद रखने की ट्रिक है। इसमें देशों का क्रम उनके BIMSTEC में शामिल होने के वर्ष के अनुसार नहीं है।
नेपाल और भूटान स्थलरुद्ध देश हैं। इसलिए BIMSTEC के सभी सदस्य देशों का बंगाल की खाड़ी के साथ समुद्री तट होना आवश्यक नहीं है।
पाकिस्तान और कंबोडिया BIMSTEC के सदस्य नहीं हैं।
दिल्ली घोषणा-पत्र क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से सामूहिक रूप से निपटने का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।
इसमें प्रमुख रूप से निम्न विषयों को शामिल किया गया।
सदस्य देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हुए आतंकवादी गतिविधियों, कट्टरपंथ और आतंकवाद के वित्तपोषण के विरुद्ध सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी तथा अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों से निपटने के लिए सूचना साझाकरण और तकनीकी सहयोग का महत्व रेखांकित किया गया।
सदस्य देशों ने मानव तस्करी और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों की रोकथाम पर जोर दिया।
अवैध ड्रग व्यापार तथा उससे जुड़े संगठित अपराधों के विरुद्ध क्षेत्रीय प्रयासों को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
अवैध वित्तीय प्रवाह, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण से निपटने में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया।
अपराधियों के प्रत्यर्पण, आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता और संबंधित कानूनी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता व्यक्त की गई।
महत्वपूर्ण अंतर: दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौते उसी दिन लागू हो गए।
Cyber Slavery ऐसी स्थिति को दर्शाता है जिसमें किसी व्यक्ति को धोखे, दबाव या जबरदस्ती के माध्यम से साइबर अपराध करने के लिए मजबूर किया जाता है।
यह मानव तस्करी और साइबर अपराध के परस्पर संबंध का एक गंभीर उदाहरण है।
मई 2026 में CBI द्वारा जारी जानकारी के अनुसार कुछ आपराधिक नेटवर्क भारतीय नागरिकों को विदेश में अधिक वेतन वाली नौकरियों का प्रस्ताव देकर दक्षिण-पूर्व एशिया ले जाते थे।
वहाँ पीड़ितों को साइबर धोखाधड़ी से जुड़े केंद्रों में रखा जाता था। कई मामलों में आवाजाही पर प्रतिबंध और पासपोर्ट जब्त करने जैसी परिस्थितियाँ सामने आईं।
इस प्रकार के अपराध कई देशों की सीमाओं को पार करते हैं।
उदाहरण के लिए, पीड़ित व्यक्ति एक देश का नागरिक हो सकता है, उसे दूसरे देश के रास्ते ले जाया जा सकता है और अपराध किसी तीसरे देश में संचालित हो सकता है।
इसलिए इनकी रोकथाम के लिए पुलिस सहयोग, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान, कानूनी सहायता, सीमा प्रबंधन तथा पीड़ितों के सुरक्षित पुनर्वास की आवश्यकता होती है।
स्पष्टता: म्यांमार BIMSTEC का सदस्य है, जबकि कंबोडिया सदस्य नहीं है। यहाँ कंबोडिया का उदाहरण व्यापक दक्षिण-पूर्व एशियाई साइबर अपराध नेटवर्क के संदर्भ में दिया गया है, न कि BIMSTEC की सदस्यता के आधार पर।
भारत की विदेश नीति में BIMSTEC का रणनीतिक महत्व है।
यह संगठन भारत को अपने पड़ोसी देशों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों से भी जोड़ता है।
भारत अपनी पड़ोसी प्रथम नीति के अंतर्गत पड़ोसी देशों के साथ व्यापार, संपर्क, सुरक्षा और विकास सहयोग को महत्व देता है।
BIMSTEC इस नीति को क्षेत्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है।
भारत की एक्ट ईस्ट नीति दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित है।
BIMSTEC में म्यांमार और थाईलैंड की उपस्थिति इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
बंगाल की खाड़ी समुद्री व्यापार, बंदरगाह संपर्क, ऊर्जा परिवहन और क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
इस क्षेत्र में सहयोग भारत की समुद्री संपर्क व्यवस्था और पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत कर सकता है।
मादक पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, साइबर अपराध और संगठित अपराध जैसे मुद्दों के कारण क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग की आवश्यकता बढ़ रही है।
BIMSTEC इन साझा समस्याओं से निपटने के लिए एक बहुपक्षीय मंच उपलब्ध कराता है।
यह UPSC मुख्य परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक विषय है।
SAARC की स्थापना 1985 में दक्षिण एशियाई देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए की गई थी।
लेकिन भारत-पाकिस्तान तनाव और सीमा-पार आतंकवाद से संबंधित विवादों ने SAARC की शिखर-स्तरीय गतिविधियों को प्रभावित किया है।
2016 में भारत ने इस्लामाबाद में प्रस्तावित 19वें SAARC शिखर सम्मेलन में भाग न लेने का निर्णय लिया था। भारत सरकार ने इसके पीछे आतंकवाद-मुक्त अनुकूल वातावरण के अभाव को कारण बताया था।
नहीं।
भारत SAARC का संस्थापक सदस्य बना हुआ है।
इसलिए यह कहना कि भारत ने SAARC छोड़कर BIMSTEC को अपना लिया, तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।
वास्तव में BIMSTEC भारत को एक अतिरिक्त क्षेत्रीय मंच प्रदान करता है, जिसके माध्यम से वह दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ आर्थिक एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ा सकता है।
| आधार | BIMSTEC | SAARC |
|---|---|---|
| स्थापना | 1997 | 1985 |
| सदस्य | 7 | 8 |
| सचिवालय | ढाका | काठमांडू |
| पाकिस्तान | सदस्य नहीं | सदस्य |
| थाईलैंड | सदस्य | सदस्य नहीं |
| प्रमुख भौगोलिक विस्तार | दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया | दक्षिण एशिया |
| भारत के लिए महत्व | Neighbourhood First और Act East के बीच संपर्क | दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग |
भारत के लिए BIMSTEC, SAARC की औपचारिक समाप्ति या कानूनी प्रतिस्थापना नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने का एक अतिरिक्त संस्थागत मंच है।
इसके माध्यम से भारत पाकिस्तान की सदस्यता वाले SAARC ढाँचे से अलग समूह में दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भी सहयोग बढ़ा सकता है।
यह विषय प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
BIMSTEC के सात प्रमुख सहयोग क्षेत्रों का नेतृत्व अलग-अलग सदस्य देश करते हैं।
| सहयोग क्षेत्र | नेतृत्वकर्ता देश |
|---|---|
| व्यापार, निवेश एवं विकास | बांग्लादेश |
| पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन | भूटान |
| सुरक्षा | भारत |
| कृषि एवं खाद्य सुरक्षा | म्यांमार |
| जन-जन संपर्क | नेपाल |
| विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार | श्रीलंका |
| संपर्क (Connectivity) | थाईलैंड |
भारत — सुरक्षा: इसमें आतंकवाद-रोधी सहयोग, अंतरराष्ट्रीय अपराध, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा जैसे उपक्षेत्र शामिल हैं।
म्यांमार — कृषि एवं खाद्य सुरक्षा: इसमें कृषि, मत्स्य पालन और पशुधन जैसे विषय शामिल हैं।
बांग्लादेश — व्यापार, निवेश एवं विकास: इसमें ब्लू इकोनॉमी से संबंधित सहयोग भी शामिल है।
इस प्रकार सात देशों के बीच सात प्रमुख क्षेत्रों का नेतृत्व वितरित किया गया है।
बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ हैं, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी मौजूद हैं।
सदस्य देशों के बीच विकास संबंधी अंतर: सभी देशों की आर्थिक क्षमता और संस्थागत संसाधन समान नहीं हैं।
राजनीतिक परिस्थितियाँ: विभिन्न देशों की घरेलू परिस्थितियाँ क्षेत्रीय परियोजनाओं की गति को प्रभावित कर सकती हैं।
क्षेत्रीय संपर्क: सड़क, रेल, बंदरगाह और व्यापार सुविधाओं में सुधार के लिए बड़े निवेश एवं समन्वय की आवश्यकता है।
सुरक्षा सहयोग: साइबर अपराध और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों में विभिन्न देशों की पुलिस तथा कानूनी संस्थाओं को मिलकर काम करना पड़ता है।
कार्यान्वयन: घोषणाओं और समझौतों को वास्तविक परिणामों में बदलने के लिए निरंतर संस्थागत प्रयास आवश्यक हैं।
BIMSTEC पर मुख्य परीक्षा का प्रश्न आने पर निम्न अवधारणाओं का उचित संदर्भ में उपयोग किया जा सकता है।
| Keyword | उत्तर में उपयोग |
|---|---|
| SAARC Minus Pakistan | BIMSTEC की अलग सदस्यता संरचना समझाने के लिए; यह संगठन का आधिकारिक नाम नहीं है |
| Bay of Bengal as a Strategic Theatre | बंगाल की खाड़ी के भू-रणनीतिक महत्व की चर्चा |
| Cooperative Regional Security | क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए साझा संस्थागत प्रयास |
| Cyber Slavery and Transnational Crime | मानव तस्करी और साइबर अपराध के संबंध की व्याख्या |
| Neighbourhood First–Act East Convergence | भारत की दोनों विदेश नीतियों के बीच संबंध |
| Maritime Connectivity | समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क |
| Capacity Building | प्रशिक्षण और संस्थागत क्षमता विकास |
| Rules-based Regional Cooperation | नियम आधारित क्षेत्रीय सहयोग |
"BIMSTEC भारत की Neighbourhood First और Act East नीतियों के बीच संस्थागत सेतु का कार्य करता है तथा बंगाल की खाड़ी को साझा आर्थिक विकास और सहयोगात्मक सुरक्षा के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखता है।"
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| BIMSTEC की स्थापना कब हुई? | 6 जून 1997 |
| स्थापना किस घोषणा-पत्र से हुई? | बैंकॉक घोषणा-पत्र |
| BIMSTEC के कितने सदस्य हैं? | सात |
| सचिवालय कहाँ है? | ढाका |
| BIMSTEC चार्टर कब लागू हुआ? | 20 मई 2024 |
| पहली गृह मंत्रियों की बैठक कब हुई? | 13 अक्टूबर 2026 |
| आयोजन कहाँ हुआ? | नई दिल्ली |
| बैठक में कौन-सा घोषणा-पत्र अपनाया गया? | दिल्ली घोषणा-पत्र |
| सुरक्षा क्षेत्र का नेतृत्व कौन करता है? | भारत |
| कृषि एवं खाद्य सुरक्षा का नेतृत्व कौन करता है? | म्यांमार |
| व्यापार, निवेश एवं विकास का नेतृत्व कौन करता है? | बांग्लादेश |
| संपर्क क्षेत्र का नेतृत्व कौन करता है? | थाईलैंड |
Question: (QID-01)
BIMSTEC के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) 1, 2 और 3
(d) केवल 1 और 3
Answer : d
Solution : कथन 1 और 3 सही हैं। BIMSTEC के सुरक्षा क्षेत्र का नेतृत्व भारत करता है, जबकि व्यापार, निवेश एवं विकास क्षेत्र का नेतृत्व बांग्लादेश करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि कृषि एवं खाद्य सुरक्षा क्षेत्र का नेतृत्व म्यांमार करता है। थाईलैंड संपर्क क्षेत्र का नेतृत्व करता है।
Question: (QID-02)
13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
Answer : a
Solution : कथन 1 और 2 सही हैं। बैठक में दिल्ली घोषणा-पत्र अपनाया गया और क्षेत्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध तथा मानव तस्करी के विरुद्ध सहयोग पर जोर दिया गया। कथन 3 गलत है क्योंकि कंबोडिया BIMSTEC का सदस्य नहीं है और बैठक में उसे सदस्य बनाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया।
प्रश्न: "BIMSTEC भारत की Neighbourhood First और Act East नीतियों के बीच एक महत्वपूर्ण संस्थागत सेतु है।" अक्टूबर 2026 की दिल्ली घोषणा के विशेष संदर्भ में BIMSTEC की सुरक्षा संबंधी भूमिका, संभावनाओं एवं चुनौतियों का विश्लेषण कीजिए।
शब्द सीमा: 250 शब्द
संबंधित पेपर: GS-II (अंतरराष्ट्रीय संबंध) एवं GS-III (आंतरिक सुरक्षा)
भूमिका में BIMSTEC की स्थापना और सात सदस्य देशों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
मुख्य भाग में बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक महत्व, भारत की दोनों विदेश नीतियों, सीमा-पार आतंकवाद, साइबर अपराध तथा मानव तस्करी पर चर्चा करें।
इसके बाद संस्थागत क्षमता, सदस्य देशों के बीच सहयोग और कानूनी व्यवस्थाओं के प्रभावी कार्यान्वयन जैसी चुनौतियों का विश्लेषण करें।
निष्कर्ष में साझा क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक संपर्क को मजबूत करने की आवश्यकता बताएं।
13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने का प्रयास किया है।
दिल्ली घोषणा-पत्र ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद, साइबर अपराध, मानव तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी समस्याओं का समाधान केवल राष्ट्रीय सीमाओं के भीतर सीमित प्रयासों से संभव नहीं है।
भारत के लिए BIMSTEC आर्थिक संपर्क, पड़ोसी देशों के साथ संबंध और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ सहयोग बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच है।
लेकिन इसकी सफलता केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के प्रभावी आदान-प्रदान, कानूनी सहयोग, प्रशिक्षण और वास्तविक कार्यान्वयन पर निर्भर करेगी।
UPSC और UPPCS के अभ्यर्थियों के लिए BIMSTEC के सदस्य देश, स्थापना वर्ष, सहयोग क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ता देश, दिल्ली घोषणा-पत्र और क्षेत्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दे विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए Daily Current Affairs का नियमित अध्ययन आवश्यक है। UPSC, UPPCS, RO/ARO और अन्य परीक्षाओं में अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध, सरकारी योजनाओं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा प्रशासनिक सुधारों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।
आज के 13 October 2026 Current Affairs in Hindi में भारत की खुदरा महंगाई दर, BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक, BHASHINI की बहुभाषी AI तकनीक, अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम, रेलवे की माल ढुलाई और CPGRAMS रिपोर्ट का अध्ययन करेंगे।
प्रत्येक समाचार के साथ उसका महत्व, मुख्य तथ्य, Prelims अभ्यास प्रश्न और Mains की तैयारी से संबंधित जानकारी भी दी गई है।
चर्चा में क्यों?
12 अक्टूबर 2026 को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation – MoSPI) ने सितंबर 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से संबंधित आंकड़े जारी किए।
इन आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर 5.54% रही। वहीं खाद्य महंगाई दर 7.74% दर्ज की गई।
| संकेतक | महंगाई दर |
|---|---|
| खुदरा महंगाई दर (CPI) | 5.54% |
| ग्रामीण खुदरा महंगाई | 6.08% |
| शहरी खुदरा महंगाई | 4.88% |
| खाद्य महंगाई दर (CFPI) | 7.74% |
| ग्रामीण खाद्य महंगाई | 8.06% |
| शहरी खाद्य महंगाई | 7.18% |
नोट: ये सितंबर 2026 के प्रारंभिक (Provisional) आंकड़े हैं।
Consumer Price Index अर्थात उपभोक्ता मूल्य सूचकांक एक आर्थिक संकेतक है, जिसका उपयोग उपभोक्ताओं द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापने के लिए किया जाता है।
इसमें उपभोग से संबंधित विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों को शामिल किया जाता है।
CPI: उपभोक्ताओं की व्यापक उपभोग टोकरी में शामिल वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य परिवर्तन को दर्शाता है।
CFPI: खाद्य एवं पेय पदार्थों की संबंधित श्रेणी के मूल्य परिवर्तन को मापता है।
महंगाई का प्रभाव उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति, घरेलू बजट, बचत, ब्याज दरों और आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।
ग्रामीण एवं शहरी महंगाई दरों के बीच अंतर का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों क्षेत्रों की उपभोग संरचना और खर्च के पैटर्न अलग हो सकते हैं।
Prelims Practice Question
Q. सितंबर 2026 में भारत की खाद्य महंगाई दर (CFPI) कितनी दर्ज की गई?
(A) 5.54%
(B) 6.08%
(C) 7.18%
(D) 7.74%
Answer: (D) 7.74%
Explanation: 12 अक्टूबर 2026 को जारी MoSPI के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में खाद्य महंगाई 7.74% और समग्र CPI महंगाई 5.54% रही।
स्रोत: MoSPI, PIB, 12 अक्टूबर 2026।
चर्चा में क्यों?
भारत ने 13 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की घोषणा की।
12 अक्टूबर को गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार इस बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।
बैठक के प्रमुख एजेंडे में आतंकवाद, सीमा-पार संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी, मानव तस्करी, अवैध वित्तीय गतिविधियाँ और साइबर सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे।
BIMSTEC (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation) दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच सहयोग का एक क्षेत्रीय संगठन है।
इसकी स्थापना 6 जून 1997 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई थी।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| स्थापना | 6 जून 1997 |
| स्थापना दस्तावेज | बैंकॉक घोषणा |
| प्रारंभिक नाम | BIST-EC |
| कुल सदस्य | 7 देश |
| स्थायी सचिवालय | ढाका, बांग्लादेश |
| सचिवालय का उद्घाटन | 13 सितंबर 2014 |
1. क्षेत्रीय संपर्क: यह दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का माध्यम है।
2. सुरक्षा सहयोग: आतंकवाद, सीमा-पार अपराध और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है।
3. आर्थिक अवसर: व्यापार, परिवहन, ऊर्जा और डिजिटल संपर्क में क्षेत्रीय समन्वय की संभावनाएँ उपलब्ध हैं।
4. विदेश नीति: BIMSTEC भारत की Neighbourhood First Policy और Act East Policy से संबंधित अध्ययन में महत्वपूर्ण है।
| आधार | BIMSTEC | SAARC |
|---|---|---|
| स्थापना | 1997 | 1985 |
| सदस्य देश | 7 | 8 |
| क्षेत्रीय विस्तार | दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया | दक्षिण एशिया |
| सचिवालय | ढाका | काठमांडू |
| पाकिस्तान सदस्य है? | नहीं | हाँ |
BIMSTEC और SAARC दोनों क्षेत्रीय सहयोग के मंच हैं, लेकिन उनकी भौगोलिक संरचना और सदस्यता अलग है।
Prelims Practice Question
Q. BIMSTEC के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?
(A) केवल 1 और 2
(B) केवल 2 और 3
(C) केवल 1 और 3
(D) 1, 2 और 3
Answer: (A) केवल 1 और 2
Explanation: BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को हुई तथा इसका स्थायी सचिवालय ढाका में है। पाकिस्तान BIMSTEC का सदस्य नहीं है।
स्रोत: गृह मंत्रालय, PIB, 12 अक्टूबर 2026; BIMSTEC की आधिकारिक वेबसाइट।
चर्चा में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ओर से मसूरी स्थित National Centre for Good Governance (NCGG) में BHASHINI और Voice-First Multilingual AI से संबंधित जानकारी प्रकाशित की गई।
यह विकास बहुभाषी तकनीक और डिजिटल सुशासन के क्षेत्र में भारत की पहल को रेखांकित करता है।
BHASHINI भारत की एक डिजिटल भाषा पहल है। इसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं में तकनीकी सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना तथा भाषा संबंधी डिजिटल बाधाओं को कम करना है।
इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) और भाषा प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है।
Voice-First AI ऐसी तकनीकी व्यवस्था को कहा जाता है जिसमें उपयोगकर्ता बोलकर किसी डिजिटल सेवा से संवाद कर सकता है।
इससे ऐसे लोगों के लिए सेवाओं का उपयोग आसान हो सकता है जिन्हें टाइपिंग या किसी विशेष भाषा में डिजिटल इंटरफेस का उपयोग करने में कठिनाई होती है।
यह विषय मुख्यतः तीन क्षेत्रों से संबंधित है:
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: Artificial Intelligence और Natural Language Processing।
सुशासन: नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवाएँ और ई-गवर्नेंस।
सामाजिक समावेशन: भाषाई विविधता के बीच तकनीक तक समान पहुँच।
Prelims Practice Question
Q. BHASHINI पहल का प्रमुख संबंध निम्नलिखित में से किससे है?
(A) अंतरिक्ष प्रक्षेपण
(B) भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल भाषा प्रौद्योगिकी
(C) जैविक कृषि
(D) समुद्री सुरक्षा
Answer: (B)
Explanation: BHASHINI भारतीय भाषाओं में AI आधारित अनुवाद, वाणी पहचान और संबंधित डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाने की पहल है।
स्रोत: MeitY, PIB, 13 अक्टूबर 2026।
चर्चा में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को Ministry of Development of North Eastern Region (Ministry of DoNER) ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया के मिजोरम विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के साथ संवाद की जानकारी जारी की।
इस दौरान गोवा और चंडीगढ़ के उन विद्यार्थियों से भी बातचीत की गई जो अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत के भ्रमण पर आए थे।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार पिछले एक वर्ष में 590 से अधिक विद्यार्थी इस कार्यक्रम में भाग ले चुके हैं।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय परंपराओं और विकास की संभावनाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर दिया जाता है।
इसका उद्देश्य युवाओं के बीच सांस्कृतिक संपर्क, पारस्परिक समझ और राष्ट्रीय एकीकरण को प्रोत्साहित करना है।
पूर्वोत्तर भारत के संदर्भ में सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास, संपर्क अवसंरचना, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकीकरण महत्वपूर्ण विषय हैं।
Prelims Practice Question
Q. अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
(A) रक्षा उत्पादन बढ़ाना
(B) केवल कृषि निर्यात को प्रोत्साहित करना
(C) पूर्वोत्तर भारत के साथ सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाना
(D) नई मुद्रा जारी करना
Answer: (C)
Explanation: अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति और विकास की संभावनाओं से परिचित कराकर क्षेत्रीय संपर्क तथा राष्ट्रीय एकीकरण को बढ़ावा देता है।
स्रोत: Ministry of DoNER, PIB, 13 अक्टूबर 2026।
चर्चा में क्यों?
रेल मंत्रालय ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी सूचना में बताया कि सितंबर 2026 में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई में पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में 6.14% की वृद्धि दर्ज हुई।
| संकेतक | मात्रा |
|---|---|
| सितंबर 2025 की माल ढुलाई | 127.52 मिलियन टन |
| सितंबर 2026 की माल ढुलाई | 135.35 मिलियन टन |
| वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि | 6.14% |
| अप्रैल–सितंबर 2026 की संचयी वृद्धि | 4.1% |
भारतीय रेलवे देश में कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, लौह अयस्क तथा अन्य औद्योगिक वस्तुओं के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
रेलवे की माल ढुलाई व्यवस्था का देश की आपूर्ति शृंखला, औद्योगिक गतिविधियों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से सीधा संबंध है।
1. औद्योगिक आपूर्ति: विभिन्न उद्योगों को आवश्यक कच्चे माल की उपलब्धता में सहायता मिलती है।
2. परिवहन क्षमता: बड़ी मात्रा में माल परिवहन के लिए रेलवे एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
3. लॉजिस्टिक्स: रेलवे का विकास मल्टीमॉडल परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में सहायक है।
4. पर्यावरणीय पहलू: उपयुक्त परिस्थितियों में सड़क परिवहन की तुलना में रेल आधारित माल परिवहन ऊर्जा दक्षता और उत्सर्जन के दृष्टिकोण से लाभकारी हो सकता है।
सितंबर 2026 में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई कितनी दर्ज की गई?
(A) 127.52 मिलियन टन
(B) 130.25 मिलियन टन
(C) 133.15 मिलियन टन
(D) 135.35 मिलियन टन
Answer: (D) 135.35 मिलियन टन
Explanation: रेल मंत्रालय के अनुसार सितंबर 2026 में 135.35 मिलियन टन माल ढुलाई हुई, जबकि सितंबर 2025 में यह 127.52 मिलियन टन थी।
स्रोत: रेल मंत्रालय, PIB, 13 अक्टूबर 2026।
चर्चा में क्यों?
13 अक्टूबर 2026 को प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (Department of Administrative Reforms and Public Grievances – DARPG) ने सितंबर 2026 से संबंधित CPGRAMS की मासिक रिपोर्ट जारी की।
केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों के लिए यह 53वीं मासिक रिपोर्ट थी, जबकि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए 50वीं मासिक रिपोर्ट जारी हुई।
CPGRAMS (Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System) एक ऑनलाइन सार्वजनिक शिकायत निवारण प्रणाली है।
इसके माध्यम से नागरिक विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं और उनकी स्थिति की निगरानी कर सकते हैं।
| संकेतक | संख्या |
|---|---|
| केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा निस्तारित शिकायतें | 2,38,579 |
| राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्राप्त शिकायतें | 99,134 |
| राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निस्तारित शिकायतें | 1,15,168 |
| उत्तर प्रदेश में निस्तारित शिकायतें | 45,970 |
| केंद्रीय मंत्रालयों की मासिक रिपोर्ट संख्या | 53वीं |
| राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की रिपोर्ट संख्या | 50वीं |
सितंबर 2026 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित शिकायत निवारण आंकड़ों में उत्तर प्रदेश ने 45,970 शिकायतों का निस्तारण दर्ज किया, जो रिपोर्ट में सर्वाधिक था।
यह तथ्य UPPCS और उत्तर प्रदेश से संबंधित परीक्षाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
CPGRAMS नागरिक-केंद्रित प्रशासन का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इसका संबंध निम्न सिद्धांतों से है:
सितंबर 2026 में CPGRAMS के अंतर्गत सर्वाधिक शिकायतों का निस्तारण किस राज्य ने दर्ज किया?
(A) उत्तर प्रदेश
(B) आंध्र प्रदेश
(C) गुजरात
(D) महाराष्ट्र
Answer: (A) उत्तर प्रदेश
Explanation: सितंबर 2026 की राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों वाली CPGRAMS रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश ने 45,970 शिकायतों का निस्तारण दर्ज किया।
स्रोत: DARPG, PIB, 13 अक्टूबर 2026।
| क्रमांक | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| 1 | सितंबर 2026 की CPI महंगाई दर 5.54% रही। |
| 2 | सितंबर 2026 में खाद्य महंगाई दर 7.74% रही। |
| 3 | CPI का आधार वर्ष 2024=100 है। |
| 4 | पहली BIMSTEC गृह मंत्रियों की बैठक 13 अक्टूबर को नई दिल्ली में निर्धारित थी। |
| 5 | BIMSTEC की स्थापना 6 जून 1997 को हुई। |
| 6 | BIMSTEC का सचिवालय ढाका में स्थित है। |
| 7 | BIMSTEC के सात सदस्य देश हैं। |
| 8 | BHASHINI भारतीय भाषाओं के लिए डिजिटल भाषा प्रौद्योगिकी पहल है। |
| 9 | अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम में 590 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। |
| 10 | सितंबर 2026 में रेलवे की माल ढुलाई 135.35 मिलियन टन रही। |
| 11 | रेलवे की माल ढुलाई में 6.14% वार्षिक वृद्धि हुई। |
| 12 | केंद्रीय मंत्रालयों ने सितंबर में 2,38,579 सार्वजनिक शिकायतें निस्तारित कीं। |
| 13 | उत्तर प्रदेश में 45,970 शिकायतों का निस्तारण हुआ। |
| 14 | DARPG ने केंद्रीय मंत्रालयों के लिए 53वीं CPGRAMS मासिक रिपोर्ट जारी की। |
UPSC / UPPCS – सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र II
"भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट ईस्ट' नीतियों के संदर्भ में BIMSTEC की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। क्या BIMSTEC को SAARC के विकल्प के रूप में देखना उचित है? तर्क सहित विवेचना कीजिए।"
शब्द सीमा: 250 शब्द
अंक: 15 (अभ्यास हेतु)
प्रश्न 1. सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर कितनी रही?
सितंबर 2026 में भारत की CPI आधारित खुदरा महंगाई दर 5.54% दर्ज की गई।
प्रश्न 2. BIMSTEC में कितने सदस्य देश हैं?
BIMSTEC के सात सदस्य देश हैं और इसका स्थायी सचिवालय ढाका में है।
प्रश्न 3. BHASHINI किस मंत्रालय से संबंधित पहल है?
BHASHINI इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से संबंधित भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी पहल है।
प्रश्न 4. अष्टलक्ष्मी दर्शन कार्यक्रम का संबंध किससे है?
इसका संबंध पूर्वोत्तर भारत में सांस्कृतिक संपर्क, युवाओं के आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकीकरण से है।
प्रश्न 5. सितंबर 2026 में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई कितनी रही?
सितंबर 2026 में भारतीय रेलवे की माल ढुलाई 135.35 मिलियन टन रही।
प्रश्न 6. CPGRAMS का पूरा नाम क्या है?
Centralized Public Grievance Redress and Monitoring System।
13 अक्टूबर 2026 के महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स में आर्थिक संकेतकों, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, डिजिटल प्रौद्योगिकी, पूर्वोत्तर भारत के विकास, रेलवे लॉजिस्टिक्स और सार्वजनिक शिकायत निवारण जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
UPSC, UPPCS और RO/ARO की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को इन घटनाओं के साथ संबंधित स्थैतिक सामान्य अध्ययन का भी पुनरावर्तन करना चाहिए।
नियमित Current Affairs Revision, Prelims MCQs और Mains Answer Writing के माध्यम से विषयों की बेहतर समझ विकसित की जा सकती है।
UPSC, UPPCS और RO/ARO 2026 की परीक्षा-केंद्रित तैयारी के लिए Lakshya IAS Academy में विषयवार मार्गदर्शन, अध्ययन सामग्री, टेस्ट सीरीज और उत्तर लेखन अभ्यास उपलब्ध है।
RO/ARO 2026 – उड़ान 6.0 Batch (Prelims + Mains) के माध्यम से अभ्यर्थी ऑफलाइन एवं ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ सकते हैं।
संस्थान: Lakshya IAS Academy
पता: शनि देव मंदिर चौराहा, तेलीबाग, लखनऊ
संपर्क/WhatsApp: 8182093320, 9236575773
वेबसाइट: https://www.lakshyaiasacademy.in/
10 अक्टूबर 2026 के महत्वपूर्ण करेंट अफेयर्स हिंदी में पढ़ें। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस, तरंग शक्ति 2026, वन अधिकार अधिनियम, नोबेल शांति पुरस्कार, BRICS खेल और RBI से जुड़े समाचार।
लेखक: Lakshya IAS Academy, Lucknow
हर वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मानसिक बीमारियों से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करना और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच को बेहतर बनाना है।
वर्ष 2026 की थीम है:
“Lived experiences heard: real voices, real change”

अर्थात मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का व्यक्तिगत अनुभव रखने वाले लोगों की आवाज को महत्व देना और उनके अनुभवों के आधार पर वास्तविक परिवर्तन लाना।
यह थीम वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ (WFMH) द्वारा निर्धारित की गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस विषय पर जागरूकता और सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस प्रतिवर्ष 10 अक्टूबर को मनाया जाता है।
इसकी शुरुआत वर्ष 1992 में हुई थी।
इसकी शुरुआत में वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ की प्रमुख भूमिका थी।
इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता तथा सामाजिक स्वीकार्यता को बढ़ाना है।
UPSC/UPPCS के लिए महत्वपूर्ण: विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की थीम निर्धारित करने वाली संस्था और WHO की भूमिका में अंतर समझना जरूरी है।
भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित तरंग शक्ति 2026 (Tarang Shakti 2026) बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास भारत के अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इस अभ्यास का आयोजन राजस्थान के जोधपुर में किया गया। 10 अक्टूबर 2026 को इसके समापन से संबंधित कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भाग लिया और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता तथा अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।

इस अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच समन्वय, परिचालन अनुभवों के आदान-प्रदान और संयुक्त सैन्य क्षमताओं को बेहतर बनाना है।
भारत और सहयोगी देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करना।
आधुनिक वायु युद्ध रणनीतियों का अनुभव साझा करना।
संयुक्त अभियानों के लिए अंतर-संचालन क्षमता विकसित करना।
भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन करना।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| अभ्यास का नाम | तरंग शक्ति 2026 |
| आयोजक | भारतीय वायुसेना |
| प्रमुख आयोजन स्थल | जोधपुर, राजस्थान |
| अभ्यास का स्वरूप | बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास |
| प्रमुख उद्देश्य | रक्षा सहयोग एवं परिचालन समन्वय |
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता, पश्चिम बंगाल में वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन की दूसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की।

इस सम्मेलन में पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, झारखंड, ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में वन अधिकारों से संबंधित लंबित दावों, सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों और विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) के आवासीय अधिकारों की समीक्षा की गई।
वन अधिकार अधिनियम, 2006 का उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य परंपरागत वन निवासियों के वन भूमि और वन संसाधनों से संबंधित पारंपरिक अधिकारों को मान्यता प्रदान करना है।
इस कानून के अंतर्गत पात्र वन निवासियों को व्यक्तिगत तथा सामुदायिक वन अधिकार दिए जा सकते हैं।
अधिनियम का वर्ष: 2006
संबंधित मंत्रालय: जनजातीय कार्य मंत्रालय
प्रमुख लाभार्थी: अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य परंपरागत वन निवासी
प्रमुख अधिकार: व्यक्तिगत वन अधिकार, सामुदायिक अधिकार तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकार
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: वन अधिकार अधिनियम, 2006 तथा पेसा अधिनियम, 1996 दोनों अलग-अलग कानून हैं। इनके उद्देश्य और प्रावधानों में अंतर समझना जरूरी है।
9 अक्टूबर 2026 को दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध मानवाधिकार विशेषज्ञ नवी पिल्लै (Navi Pillay) को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई।

उन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून, न्याय, मानवाधिकारों की रक्षा तथा शांति को बढ़ावा देने के क्षेत्र में लंबे समय से किए गए योगदान के लिए चुना गया है।
नवी पिल्लै दक्षिण अफ्रीका की विधिवेत्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में भी कार्य किया है।
उनका कार्य विशेष रूप से मानवाधिकार संरक्षण, अंतरराष्ट्रीय न्याय और भेदभाव के विरुद्ध कानूनी संघर्षों से जुड़ा रहा है।
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| वर्ष | 2026 |
| विजेता | नवी पिल्लै |
| देश | दक्षिण अफ्रीका |
| घोषणा | 9 अक्टूबर 2026 |
| चयन करने वाली संस्था | नॉर्वेजियन नोबेल समिति |
| पुरस्कार समारोह का स्थान | ओस्लो, नॉर्वे |
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: नोबेल शांति पुरस्कार नॉर्वे में प्रदान किया जाता है, जबकि अन्य नोबेल पुरस्कार सामान्यतः स्वीडन में प्रदान किए जाते हैं।
भारत की BRICS अध्यक्षता के अंतर्गत 12 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद के वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में BRICS Traditional and Indigenous Sports Demonstration Games 2026 का आयोजन निर्धारित है।

भारत सरकार के युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय तथा गुजरात सरकार के सहयोग से यह आयोजन किया जाएगा।
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया द्वारा इसका उद्घाटन किया जाना निर्धारित है।
BRICS देशों के पारंपरिक एवं स्वदेशी खेलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना और उनके सांस्कृतिक महत्व को संरक्षित करना इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है।
यह आयोजन मुख्य रूप से गैर-प्रतिस्पर्धात्मक स्वरूप का होगा, जिसमें विभिन्न देशों की पारंपरिक खेल विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| आयोजन | BRICS Traditional and Indigenous Sports Demonstration Games 2026 |
| स्थान | अहमदाबाद, गुजरात |
| तिथि | 12 अक्टूबर 2026 |
| आयोजन स्थल | वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स |
| भारतीय आयोजक | युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय तथा गुजरात सरकार |
भारत की ओर से मल्लखंब, योगासन और कलारीपयट्टू जैसी पारंपरिक खेल विधाओं का प्रदर्शन प्रस्तावित है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण: BRICS के अंतर्गत आर्थिक सहयोग के अतिरिक्त सांस्कृतिक, खेल एवं जन-से-जन संबंधों को भी बढ़ावा दिया जाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 अक्टूबर 2026 को बैंकिंग प्रणाली में अतिरिक्त तरलता कम करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण मौद्रिक कदम घोषित किए।

समाचार एजेंसी Reuters के अनुसार, RBI ने खुले बाजार परिचालन (Open Market Operations – OMO) के माध्यम से ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने की योजना बनाई है।
इसके अतिरिक्त बैंकों के लिए नकद आरक्षित अनुपात (CRR) की दैनिक न्यूनतम रखरखाव आवश्यकता को 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत करने की घोषणा की गई है। यह बदलाव 16 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होना निर्धारित है।
खुले बाजार परिचालन के तहत RBI सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद और बिक्री करता है।
जब RBI सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदता है, तब सामान्यतः बाजार में तरलता बढ़ती है।
जब RBI सरकारी प्रतिभूतियाँ बेचता है, तब सामान्यतः बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध तरलता कम होती है।
नकद आरक्षित अनुपात (Cash Reserve Ratio – CRR) वह अनुपात है, जिसके अनुसार बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और सावधि देनदारियों (NDTL) का एक निर्धारित हिस्सा नकद रिजर्व के रूप में RBI के पास रखना होता है।
RBI द्वारा घोषित नया नियम CRR की दर को 99 प्रतिशत करना नहीं है, बल्कि निर्धारित CRR के दैनिक न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता को 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत करना है।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| संस्था | भारतीय रिजर्व बैंक |
| घोषणा तिथि | 9 अक्टूबर 2026 |
| OMO बॉन्ड बिक्री | ₹25,000 करोड़ |
| पूर्व दैनिक CRR रखरखाव | 90% |
| नया दैनिक CRR रखरखाव | 99% |
| प्रभावी तिथि | 16 अक्टूबर 2026 |
| प्रमुख उद्देश्य | अतिरिक्त तरलता का नियंत्रण |
प्रश्न 1. विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम क्या है?
(a) Mental Health at Work
(b) Lived experiences heard: real voices, real change
(c) Mental Health in Humanitarian Emergencies
(d) Make Mental Health a Global Priority
Answer : b
Solution : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 की थीम “Lived experiences heard: real voices, real change” है। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का व्यक्तिगत अनुभव रखने वाले लोगों की आवाज को महत्व देना है।
प्रश्न 2. तरंग शक्ति 2026 का संबंध किससे है?
(a) बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास
(b) संयुक्त थलसेना अभ्यास
(c) बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास
(d) अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रम
Answer : c
Solution : तरंग शक्ति भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास है, जिसका उद्देश्य विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के बीच सहयोग और परिचालन समन्वय बढ़ाना है।
प्रश्न 3. वन अधिकार अधिनियम, 2006 के कार्यान्वयन की दूसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक अक्टूबर 2026 में कहाँ आयोजित की गई?
(a) रांची
(b) कोलकाता
(c) भुवनेश्वर
(d) गुवाहाटी
Answer : b
Solution : जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 9 अक्टूबर 2026 को कोलकाता में दूसरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की।
प्रश्न 4. वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार किसे देने की घोषणा की गई?
(a) नवी पिल्लै
(b) एंटोनियो गुटेरेस
(c) मलाला यूसुफजई
(d) ग्रेटा थनबर्ग
Answer : a
Solution : वर्ष 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार विशेषज्ञ नवी पिल्लै को चुना गया है।
प्रश्न 5. BRICS Traditional and Indigenous Sports Demonstration Games 2026 का आयोजन किस शहर में निर्धारित है?
(a) नई दिल्ली
(b) मुंबई
(c) अहमदाबाद
(d) जयपुर
Answer : c
Solution : इसका आयोजन 12 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद स्थित वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में निर्धारित है।
प्रश्न 6. अक्टूबर 2026 में RBI ने CRR की दैनिक न्यूनतम रखरखाव आवश्यकता को कितने प्रतिशत करने की घोषणा की?
(a) 90 प्रतिशत
(b) 95 प्रतिशत
(c) 97 प्रतिशत
(d) 99 प्रतिशत
Answer : d
Solution : RBI ने निर्धारित CRR की दैनिक न्यूनतम रखरखाव आवश्यकता 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 99 प्रतिशत करने की घोषणा की। यह परिवर्तन 16 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होना निर्धारित है।
10 अक्टूबर 2026 के करेंट अफेयर्स में मानसिक स्वास्थ्य, अंतरराष्ट्रीय रक्षा सहयोग, जनजातीय अधिकार, नोबेल पुरस्कार, सांस्कृतिक खेल सहयोग और मौद्रिक नीति से संबंधित घटनाएँ महत्वपूर्ण हैं।
UPSC, UPPCS और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को इन घटनाओं के साथ संबंधित संस्थाओं, अधिनियमों और प्रमुख अवधारणाओं का अध्ययन भी करना चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षाओं में Current Affairs का महत्व केवल नवीन घटनाओं को याद करने तक सीमित नहीं है। आज प्रश्नों में किसी योजना की संरचना, किसी संस्था की भूमिका, तकनीकी विशेषताओं, संबंधित मंत्रालय तथा static background से भी तथ्य पूछे जाते हैं। इसलिए Current Affairs की तैयारी Current + Static + Exam Relevance के रूप में करनी चाहिए।
6 अक्टूबर 2026 के महत्वपूर्ण Current Affairs में MSME क्षेत्र, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, डिजिटल स्वास्थ्य, उत्तर प्रदेश की सौर ऊर्जा उपलब्धि, छात्रवृत्ति वितरण, नौसेना की स्वदेशी क्षमता, जलवायु वार्ता तथा रक्षा अनुसंधान प्रमुख रहे।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Small and Medium Enterprises (SMEs) के लिए ₹10,000 करोड़ के SME Growth Fund की स्थापना हेतु भारत सरकार की प्रतिबद्धता को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य विकास की क्षमता रखने वाले छोटे और मध्यम उद्यमों को direct equity capital उपलब्ध कराकर उन्हें बड़े एवं प्रतिस्पर्धी भारतीय उद्यमों के रूप में विकसित करना है। यह घोषणा Union Budget 2026-27 में भी की गई थी।
यह fund विशेष रूप से manufacturing, services, technology, innovation-driven sectors तथा strategic value chains में growth-oriented enterprises को सहायता देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा कई equity funds का फोकस शुरुआती स्तर के अथवा micro enterprises पर अधिक रहा है, इसलिए यह नया fund SMEs की growth-stage financing gap को address करने का प्रयास करता है।
MSME क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में रोजगार, विनिर्माण, निर्यात और स्थानीय उद्यमिता का प्रमुख आधार है। Union Budget 2026-27 में SME Growth Fund के साथ Self-Reliant India Fund को भी अतिरिक्त ₹2,000 करोड़ दिए जाने की घोषणा की गई थी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने Integrated Transport & Logistics Authority (ITLA) नामक Special Purpose Vehicle स्थापित करने को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य भारत में transport और logistics से जुड़े विभिन्न मंत्रालयों और agencies के बीच fragmented planning को कम करना तथा integrated, multi-modal planning को मजबूत करना है।
ITLA केवल advisory body नहीं होगी। इसे transport infrastructure planning, project appraisal, monitoring, policy support तथा data analytics में apex institution के रूप में विकसित किया जाएगा।
भारत की logistics efficiency बढ़ाने, infrastructure duplication कम करने और multimodal connectivity मजबूत करने में ITLA की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इसका दीर्घकालीन उद्देश्य logistics cost कम करना और Vision 2047 के अनुरूप global competitiveness बढ़ाना है।
National Logistics Policy, 2022 का उद्देश्य भारत में logistics ecosystem को अधिक efficient और integrated बनाना है। ITLA इसी broader logistics reform framework से जुड़ा हुआ है।
भारत की राष्ट्रीय telemedicine service e-Sanjeevani ने 50 करोड़ से अधिक teleconsultations का आंकड़ा पार कर लिया है। 15 सितंबर 2026 तक कुल 50,00,92,730 consultations दर्ज की गईं।
यह platform 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में कार्य कर रहा है और remote तथा underserved क्षेत्रों में digital healthcare access बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में platform 1.42 लाख से अधिक Ayushman Arogya Mandir spokes, 19,473 medical hubs और 901 online OPDs को support करता है।
e-Sanjeevani में अब AI-powered Clinical Decision Support System और ERSS-112 जैसी सुविधाओं का integration भी किया गया है। इससे यह केवल primary teleconsultation platform न रहकर specialist healthcare delivery की दिशा में भी विकसित हो रहा है।
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार राज्य में 8.76 लाख से अधिक rooftop solar plants लगाए जा चुके हैं, जिससे उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत देश में शीर्ष स्थान पर पहुँच गया है।
प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य residential rooftop solar को बढ़ावा देना है। योजना का कुल outlay ₹75,021 करोड़ है और इसका लक्ष्य एक करोड़ households तक rooftop solar पहुँचाना है। योजना के अंतर्गत eligible households को प्रति माह 300 units तक free electricity का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
Rooftop Solar systems grid-connected होते हैं और residential consumers National Portal के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। Installation और verification के बाद CFA लाभार्थी के खाते में transfer किया जाता है।
यह योजना निम्न topics से जोड़कर पढ़ें:
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के implementation के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। यह उपलब्धि urban housing delivery और implementation performance से जुड़ी है।
PMAY-Urban का मुख्य उद्देश्य urban areas में eligible beneficiaries को affordable housing उपलब्ध कराने में सहायता देना है। परीक्षा में scheme से जुड़े निम्न बिंदु महत्वपूर्ण होते हैं:
उत्तर प्रदेश में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में 4,60,559 विद्यार्थियों को Direct Benefit Transfer के माध्यम से छात्रवृत्ति वितरित की गई।
Direct Benefit Transfer का उद्देश्य सरकारी subsidy और financial benefits को सीधे लाभार्थियों के bank accounts में पहुँचाना है। इससे leakages कम करने, fake beneficiaries हटाने और intermediaries को कम करने में सहायता मिलती है।
DBT की कार्यप्रणाली में JAM Trinity की महत्वपूर्ण भूमिका है:
Jan Dhan accounts financial access देते हैं, Aadhaar beneficiary authentication में मदद करता है और mobile information तथा digital access को सक्षम बनाता है।
रक्षा मंत्री ने Hindustan Shipyard Limited, Visakhapatnam में भारत के पहले indigenous Fleet Support Ship Surya को लॉन्च किया। यह FSS-1 है और पाँच Fleet Support Ships की श्रृंखला का पहला पोत है।
इन ships का उद्देश्य समुद्र में युद्धपोतों को fuel, supplies तथा अन्य logistical support देकर Indian Navy की endurance और operational reach बढ़ाना है। FSS platforms में enhanced cargo और fluid capacity, onboard maintenance workshops, helicopter deck और self-defence systems भी शामिल होंगे।
इसी अवसर पर Hindustan Shipyard Limited में:
का उद्घाटन भी किया गया।
Slipway-4 को इस प्रकार विकसित किया गया है कि HSL 45,000 DWT तक के जहाज build और launch कर सके। 300-tonne Goliath Crane आधुनिक block construction में भारी ship blocks को अधिक तेजी और सटीकता से handle करने में मदद करेगी।
Fleet Support Ships को पढ़ते समय इन topics को जोड़ें:
DRDO ने Advanced High-Altitude Parachute का maiden live jump किया है। यह achievement high-altitude military operations और indigenous defence technology development से जुड़ी है।
DRDO का गठन 1958 में हुआ था। इसका गठन Technical Development Establishments, Directorate of Technical Development & Production और Defence Science Organisation के amalgamation से हुआ था।
DRDO Ministry of Defence के अंतर्गत कार्य करता है और missiles, radars, electronic warfare, combat vehicles, aeronautics और naval systems सहित अनेक defence technologies पर कार्य करता है।
Pre-COP31 meeting में भारत ने यह स्पष्ट किया कि global climate action केवल mitigation तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत ने Adaptation, Mitigation और Means of Implementation—तीनों को समान महत्व देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत ने climate negotiations में Equity तथा Common but Differentiated Responsibilities and Respective Capabilities (CBDR-RC) के सिद्धांतों को भी महत्वपूर्ण बताया।
Mitigation: Greenhouse gas emissions कम करने की प्रक्रिया।
Adaptation: Climate change के प्रभावों के अनुरूप ecological, social और economic systems को तैयार करना।
Means of Implementation: Climate finance, technology transfer और capacity building।
CBDR-RC: सभी देशों की जलवायु परिवर्तन से लड़ने की जिम्मेदारी है, लेकिन उनकी historical responsibility और capabilities अलग-अलग हैं।
इसे इन topics से जोड़कर पढ़ें:
भारत और स्विट्जरलैंड ने joint research, innovation तथा scientific cooperation को मजबूत करने पर चर्चा की है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के research institutions के बीच knowledge exchange और collaborative research को बढ़ावा देना है।
International Science Cooperation से संबंधित प्रश्नों में निम्न बातों पर ध्यान दें:
| विषय | मुख्य तथ्य |
|---|---|
| SME Growth Fund | ₹10,000 करोड़ |
| ITLA | Integrated Transport & Logistics Authority |
| ITLA Project Appraisal | ₹500 करोड़ या अधिक |
| NTDR | National Transport Data Repository |
| e-Sanjeevani | 50 करोड़+ consultations |
| UP Rooftop Solar | 8.76 लाख+ plants |
| PM Surya Ghar | ₹75,021 करोड़ outlay |
| UP Scholarship | 4,60,559 विद्यार्थी |
| Fleet Support Ship | Surya |
| Goliath Crane | 300 tonne |
| HSL shipbuilding capacity | 45,000 DWT तक |
| DRDO | गठन 1958 |
| Pre-COP31 | Adaptation + Mitigation + Means of Implementation |
| Climate Principle | CBDR-RC |
(a) केवल रेलवे परियोजनाएँ
(b) केवल सड़क परियोजनाएँ
(c) केंद्र सरकार की transport और infrastructure projects
(d) केवल बंदरगाह परियोजनाएँ
Ans: c
Explanation: ITLA केंद्र सरकार की ₹500 करोड़ या अधिक लागत वाली infrastructure projects का technical appraisal करेगी।
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1, 3 और 4
(d) 1, 2, 3 और 4
Ans: d
Explanation: NTDR transport और logistics planning के लिए इन सभी data sources सहित विभिन्न databases का उपयोग करेगा।
(a) ₹60,000 करोड़
(b) ₹70,021 करोड़
(c) ₹75,021 करोड़
(d) ₹80,000 करोड़
Ans: c
Explanation: योजना का कुल outlay ₹75,021 करोड़ है।
(a) NIC
(b) C-DAC
(c) ISRO
(d) NITI Aayog
Ans: b
Explanation: e-Sanjeevani का technological development C-DAC द्वारा किया गया है।
(a) Aircraft Carrier
(b) Destroyer
(c) Fleet Support Ship
(d) Submarine
Ans: c
Explanation: Surya भारत का पहला indigenous Fleet Support Ship है।
(a) 1947
(b) 1952
(c) 1958
(d) 1962
Ans: c
Explanation: DRDO का गठन 1958 में हुआ था।
(a) International Trade
(b) Climate Change Negotiations
(c) Maritime Security
(d) Monetary Policy
Ans: b
Explanation: CBDR-RC UNFCCC framework में climate responsibility से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
6 October 2026 के Current Affairs में केवल घटनाएँ ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे की institutional और technical details भी परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी हैं। विशेष रूप से ITLA की ₹500 करोड़ threshold, National Transport Data Repository, SME Growth Fund, e-Sanjeevani की digital health infrastructure, PM Surya Ghar की subsidy structure, Fleet Support Ship Surya की shipbuilding technology तथा Pre-COP31 में CBDR-RC जैसे बिंदु Prelims और Mains दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
“UPPSC RO/ARO की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी Prelims और Mains के पूरे syllabus और exam pattern के लिए UPPSC RO ARO 2026 Syllabus in Hindi भी पढ़ें।”
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