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Daily Current Affairs: 15 अक्टूबर 2026 राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यायिक सुधार, RDI योजना और मिशन कर्मयोगी
10/15/2026
भारत की प्रतियोगी परीक्षाओं में समसामयिक घटनाओं से जुड़े प्रश्न अब केवल तारीख, स्थान या व्यक्तियों के नाम तक सीमित नहीं रहते। एक समाचार से भूगोल, संविधान, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रशासनिक सुधार जैसे कई विषयों पर प्रश्न तैयार किए जा सकते हैं।
आज के Current Affairs में हम चार महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन करेंगे:
लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाएँ और तीसरा सामरिक सड़क मार्ग।
लंबित न्यायिक मामलों के समाधान के लिए 100 जिलों पर विशेष पहल।
RDI योजना का विस्तार और भारत में अनुसंधान निवेश की स्थिति।
लखनऊ में मिशन कर्मयोगी की क्षेत्रीय कार्यशाला।
हर घटना के साथ महत्वपूर्ण तथ्य, उसका व्यापक महत्व और UPSC/UPPCS Mains के लिए विश्लेषण भी दिया गया है।
1. लद्दाख में ₹3,350 करोड़ की विकास परियोजनाएँ: राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा
भारत सरकार ने 15 अक्टूबर 2026 को लद्दाख में लगभग ₹3,350 करोड़ की पाँच विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं लोकार्पण का कार्यक्रम निर्धारित किया।

ये परियोजनाएँ सड़क संपर्क, हवाई यातायात, जलविद्युत, जल संरक्षण और पुरातात्त्विक विरासत के संरक्षण से संबंधित हैं।
पाँच प्रमुख परियोजनाएँ
| परियोजना | मुख्य विशेषता |
|---|---|
| लेह हवाई अड्डे का नया यात्री टर्मिनल | ₹640 करोड़ की लागत, सालाना 35 लाख यात्रियों की क्षमता |
| निम्मू–पदुम–दारचा सड़क | 298 किमी लंबा वैकल्पिक सामरिक मार्ग |
| हानू लघु जलविद्युत परियोजना एवं दाह–हानू–खालसी ट्रांसमिशन लाइन | 9 मेगावाट जलविद्युत एवं 66 kV विद्युत लाइन |
| पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह में सांस्कृतिक विरासत संरक्षण |
| प्रोजेक्ट हिम सरोवर | 40 गाँवों में 40 जल निकाय |
निम्मू–पदुम–दारचा सड़क का सामरिक महत्व
निम्मू–पदुम–दारचा (NPD) मार्ग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया गया है। यह हिमाचल प्रदेश के दारचा को जांस्कर घाटी के रास्ते लद्दाख के निम्मू से जोड़ता है।
यह मार्ग लद्दाख को देश के अन्य भागों से जोड़ने वाला तीसरा सड़क अक्ष (Third Axis) है।
लद्दाख के तीन प्रमुख सड़क संपर्क मार्ग हैं:
श्रीनगर–कारगिल–लेह मार्ग
मनाली–लेह मार्ग
निम्मू–पदुम–दारचा मार्ग
तीसरे मार्ग की आवश्यकता क्यों?
पहले दो मार्गों के अतिरिक्त तीसरा विकल्प उपलब्ध होने से किसी एक सड़क के बाधित होने पर वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग का उपयोग किया जा सकता है।
इसका महत्व विशेष रूप से तीन दृष्टियों से है:
राष्ट्रीय सुरक्षा: सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद की आवाजाही के लिए अतिरिक्त मार्ग उपलब्ध होता है।
रणनीतिक लचीलापन: पारंपरिक मार्गों पर निर्भरता घटती है। इस मार्ग की भौगोलिक स्थिति कुछ सैन्य संचालन परिस्थितियों में रणनीतिक लाभ दे सकती है, लेकिन इसे पूरी तरह शत्रु की निगरानी से सुरक्षित मानना उचित नहीं है।
स्थानीय विकास: जांस्कर घाटी के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और पर्यटन से बेहतर संपर्क मिल सकता है।
शिंकू ला सुरंग का महत्व
NPD मार्ग पर स्थित शिंकू ला दर्रे के नीचे लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग की परियोजना है।
इसका उद्देश्य सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण होने वाली संपर्क संबंधी कठिनाइयों को कम करना और पूरे वर्ष सड़क संपर्क उपलब्ध कराना है।
महत्वपूर्ण: सुरंग के पूरा होने पर All-Weather Connectivity की क्षमता विकसित होगी। वर्तमान सड़क को बिना इस शर्त के पूर्णतः बारहमासी घोषित नहीं करना चाहिए।
पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क: कला एवं संस्कृति के लिए महत्वपूर्ण
Petroglyphs (शैलोत्कीर्ण चित्र) प्राचीन चट्टानों पर उकेरी गई आकृतियाँ, प्रतीक और चित्र होते हैं।
भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की स्थापना लद्दाख के सिंधु घाट, लेह में की गई है।
लद्दाख की जांस्कर और नुब्रा जैसी घाटियों में विभिन्न कालखंडों की शैलकला के प्रमाण मिले हैं।
पुरातात्त्विक अध्ययनों में कुछ शैलचित्रों को कांस्य युग एवं लौह युग से संबंधित माना गया है। इनमें पशुओं, शिकार, मानव आकृतियों और प्रतीकों का चित्रण मिलता है।
इनमें से कुछ कलात्मक शैलियों में मध्य एशिया, तिब्बत और साइबेरियाई क्षेत्रों की शैलकला से समानताएँ भी देखी गई हैं, जो प्राचीन सांस्कृतिक संपर्कों के अध्ययन में उपयोगी हैं।
Quick Facts — लद्दाख
| तथ्य | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| NPD मार्ग | 298 किमी |
| निर्माण एजेंसी | BRO |
| तीसरा सड़क अक्ष | निम्मू–पदुम–दारचा |
| शिंकू ला सुरंग | लगभग 4.1 किमी, ट्विन-ट्यूब परियोजना |
| पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह |
| हानू जलविद्युत परियोजना | 9 मेगावाट |
| प्रोजेक्ट हिम सरोवर | 40 गाँवों में 40 जल निकाय |
Prelims Focus: BRO, शिंकू ला दर्रा, जांस्कर घाटी, शैलचित्र, कांस्य युग, लौह युग।
Mains GS-III: सीमावर्ती अवसंरचना का राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय विकास और स्थानीय समुदायों पर प्रभाव।
Mains GS-I: लद्दाख की शैलकला प्राचीन भारत और मध्य एशिया के सांस्कृतिक संपर्कों का अध्ययन करने में किस प्रकार सहायक है?
2. न्यायिक लंबित मामलों के समाधान के लिए 100 जिलों में विशेष पहल
भारत की न्यायिक प्रणाली में लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या न्याय तक समयबद्ध पहुँच के सामने एक प्रमुख चुनौती है।
14 अक्टूबर 2026 को विधि एवं न्याय मंत्रालय ने 100 ऐसे न्यायिक जिलों पर केंद्रित अनुसंधान-आधारित पहल की जानकारी दी, जहाँ लंबित मामलों का बोझ अधिक है।
इस पहल में 16 राज्यों के 19 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों (NLUs) की भागीदारी की व्यवस्था की गई है।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार देशभर के न्यायालयों में 5.8 करोड़ से अधिक मामले लंबित थे और चुने गए 100 जिलों में जिला न्यायालयों के लंबित मामलों का आधे से अधिक हिस्सा केंद्रित था।
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG) क्या है?
National Judicial Data Grid (NJDG) एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से न्यायालयों में दर्ज, निस्तारित और लंबित मामलों के आँकड़ों का अध्ययन किया जा सकता है।
इसके माध्यम से निम्न जानकारी प्राप्त होती है:
दीवानी एवं आपराधिक मामलों की स्थिति
लंबित मामलों की अवधि
राज्य एवं जिलावार आँकड़े
मामलों के निस्तारण की स्थिति
न्यायिक विलंब के संभावित कारण
e-Courts Project Phase III क्या है?
भारत सरकार द्वारा e-Courts Project के तीसरे चरण (2023–2027) को ₹7,210 करोड़ के वित्तीय प्रावधान के साथ स्वीकृति दी गई थी।
इस चरण के प्रमुख उद्देश्य हैं:
न्यायालयों के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण।
ई-फाइलिंग और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का विस्तार।
विभिन्न न्यायिक और प्रशासनिक प्रणालियों के बीच डिजिटल समन्वय।
पारदर्शिता एवं न्यायिक सेवाओं की पहुँच में सुधार।
विशेष तथ्य: डिजिटलीकरण का उद्देश्य मामलों के प्रबंधन को बेहतर बनाना है, लेकिन केवल तकनीक के उपयोग से सभी लंबित मामलों का समाधान अपने आप नहीं हो सकता।
मध्यस्थता अधिनियम, 2023 (Mediation Act)
न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ घटाने के लिए Alternative Dispute Resolution (ADR) की महत्वपूर्ण भूमिका है।
ADR के प्रमुख तरीकों में मध्यस्थता (Mediation), सुलह (Conciliation), पंचाट (Arbitration) और लोक अदालत जैसी व्यवस्थाएँ शामिल हैं।
मध्यस्थता अधिनियम, 2023 का उद्देश्य विवादों के आपसी समाधान के लिए एक विधिक ढाँचा उपलब्ध कराना है।
इसके अंतर्गत मध्यस्थता, मध्यस्थता समझौते और संस्थागत मध्यस्थता जैसे विषयों के प्रावधान हैं। अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की स्थिति को संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं के अनुसार समझना चाहिए।
न्यायिक सुधारों के बावजूद लंबित मामले क्यों बढ़ते हैं?
न्यायिक विलंब की समस्या केवल तकनीक की कमी से उत्पन्न नहीं होती। इसके अनेक संरचनात्मक कारण हैं।
न्यायिक रिक्तियाँ: न्यायाधीशों और सहायक कर्मचारियों की कमी से मामलों के निस्तारण में कठिनाई हो सकती है।
सरकारी मुकदमेबाजी: सरकार स्वयं अनेक मामलों में वादी या प्रतिवादी होती है।
बार-बार स्थगन: सुनवाई का स्थगित होना मामलों की अवधि बढ़ा सकता है।
प्रक्रियागत जटिलताएँ: समन की तामील, साक्ष्य और दस्तावेजों से संबंधित प्रक्रियाओं में समय लगता है।
असमान बुनियादी सुविधाएँ: विभिन्न न्यायालयों के बीच संसाधनों और तकनीकी क्षमताओं में अंतर भी परिणाम प्रभावित करता है।
इसलिए न्यायिक सुधार में डिजिटल तकनीक + न्यायिक मानव संसाधन + प्रक्रियागत सुधार + ADR को एक साथ अपनाना आवश्यक है।
संवैधानिक संबंध
| अनुच्छेद | संबंधित विषय |
|---|---|
| अनुच्छेद 14 | विधि के समक्ष समानता |
| अनुच्छेद 21 | जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता; न्यायिक व्याख्या में शीघ्र न्याय |
| अनुच्छेद 39A | समान न्याय एवं निःशुल्क विधिक सहायता |
| अनुच्छेद 50 | न्यायपालिका को कार्यपालिका से पृथक करना |
Key Takeaway — न्यायिक सुधार
चिह्नित न्यायिक जिले
100
संबद्ध NLUs
19
लंबित मामलों का सरकारी संदर्भ आँकड़ा
5.8 करोड़+
e-Courts Phase III
₹7,210 करोड़
मुख्य शब्द: NJDG, e-Courts Phase III, ADR, Mediation Act 2023, अनुच्छेद 39A।
Prelims Focus: राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड, e-Courts, मध्यस्थता अधिनियम, अनुच्छेद 21 एवं 39A।
Mains GS-II: न्यायिक लंबित मामलों की संरचनात्मक समस्या और न्याय तक समयबद्ध पहुँच सुनिश्चित करने के उपाय।
3. RDI योजना का विस्तार: भारत में अनुसंधान एवं नवाचार को नई गति
भारत सरकार ने 14 अक्टूबर 2026 को Research, Development and Innovation (RDI) Scheme के अंतर्गत नए तकनीकी क्षेत्रों को शामिल करने की जानकारी दी।
इस निर्णय के अनुसार Advanced Chemicals, Petrochemicals and Material Technologies को वित्तीय सहायता के अतिरिक्त पात्र क्षेत्र के रूप में शामिल किया गया।

यह विस्तार 8 अक्टूबर 2026 से प्रभावी है। निर्णय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा रसायन एवं पेट्रोरसायन विभाग के प्रस्ताव पर लिया गया।
RDI योजना क्या है?
RDI का पूरा नाम Research, Development and Innovation है।
इसका उद्देश्य विशेष रूप से निजी क्षेत्र और तकनीक आधारित उद्यमों को अनुसंधान, नई प्रौद्योगिकी और नवाचार में अधिक निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
केंद्र सरकार की RDI योजना के लिए ₹1 लाख करोड़ का वित्तीय प्रावधान घोषित किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य दीर्घकालिक अनुसंधान और तकनीकी विकास के लिए वित्तपोषण का समर्थन करना है।
ANRF क्या है?
Anusandhan National Research Foundation (ANRF) की स्थापना ANRF Act, 2023 के अंतर्गत की गई।
यह संस्थान भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को रणनीतिक दिशा देने के लिए बनाया गया है।
इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:
विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों में शोध को प्रोत्साहन।
उद्योग एवं शिक्षा जगत के बीच सहयोग।
प्रतिस्पर्धी अनुसंधान वित्तपोषण को बढ़ावा।
वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक और औद्योगिक आवश्यकताओं से जोड़ना।
ANRF के लिए 2023–2028 की अवधि में ₹50,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
ध्यान दें: ANRF और RDI योजना एक ही संस्था या योजना नहीं हैं। दोनों भारत के व्यापक अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र के अलग-अलग, लेकिन परस्पर पूरक घटक हैं।
भारत में R&D निवेश की स्थिति
भारत के लिए अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ाना एक महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी चुनौती है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में GDP के अनुपात में R&D व्यय लगभग 0.64% बताया गया था।
हालाँकि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जुलाई 2026 में प्रस्तुत Research & Development Statistics 2025–26 के अनुसार, 2023–24 के लिए GERD/GDP अनुपात 0.84% दर्ज किया गया।
इसलिए परीक्षा की तैयारी में आँकड़े का वर्ष और उसका स्रोत ध्यान में रखना आवश्यक है।
भारत में R&D व्यय: GDP के प्रतिशत के रूप में
0%0.25%0.5%0.75%1%2019–202020–212021–222022–232023–24
नवीनतम प्रकाशित श्रृंखला में 2023–24 का अनुपात 0.84% है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी क्यों आवश्यक है?
पहला कारण — अनुसंधान निवेश: सार्वजनिक वित्तपोषण के साथ निजी कंपनियों का निवेश जुड़ने से उपलब्ध संसाधन बढ़ सकते हैं।
दूसरा कारण — तकनीक का व्यावसायिक उपयोग: प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को उपयोगी उत्पादों में बदलना आसान हो सकता है।
तीसरा कारण — आयात निर्भरता: उन्नत सामग्री, औद्योगिक रसायन और अन्य जटिल प्रौद्योगिकियों के घरेलू विकास को सहायता मिल सकती है।
चौथा कारण — रोजगार एवं स्टार्टअप: अनुसंधान आधारित उद्यमिता और उच्च कौशल वाले रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
RDI और ANRF: परीक्षा के लिए अंतर
| आधार | RDI योजना | ANRF |
|---|---|---|
| मुख्य प्रकृति | वित्तपोषण एवं नवाचार समर्थन | अनुसंधान को रणनीतिक दिशा देने वाली संस्था |
| प्रमुख लक्ष्य | तकनीकी विकास एवं औद्योगिक R&D | व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान |
| प्रमुख फोकस | उन्नत प्रौद्योगिकी, निजी क्षेत्र की भागीदारी | शोध संस्थान, विश्वविद्यालय एवं उद्योग सहयोग |
| संदर्भ राशि | ₹1 लाख करोड़ | ₹50,000 करोड़ का 2023–28 लक्ष्य |
Quick Facts — RDI
RDI: Research, Development and Innovation
ANRF: Anusandhan National Research Foundation
ANRF Act: 2023
RDI योजना का वित्तीय प्रावधान: ₹1 लाख करोड़
नए पात्र क्षेत्र: Advanced Chemicals, Petrochemicals and Material Technologies
विस्तार प्रभावी: 8 अक्टूबर 2026
GERD/GDP: DST की प्रकाशित 2023–24 श्रृंखला में 0.84%
Prelims Focus: ANRF, DST, RDI Scheme, GERD, औद्योगिक अनुसंधान।
Mains GS-III: भारत में R&D निवेश, निजी क्षेत्र की भूमिका और तकनीकी आत्मनिर्भरता।
4. लखनऊ में मिशन कर्मयोगी की क्षेत्रीय कार्यशाला: प्रशासनिक सुधार की नई दिशा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 23–24 अक्टूबर 2026 को सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के रूपांतरण से संबंधित तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित करने की घोषणा की गई है।
यह कार्यक्रम साधना शृंखला 2026 (Sādhana Shrinkhla) के अंतर्गत क्षमता निर्माण आयोग (CBC) द्वारा आयोजित किया जाएगा।

कार्यशाला का उद्देश्य सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों को अधिक आधुनिक, प्रभावी और दक्षता-केंद्रित संस्थानों के रूप में विकसित करना है।
मिशन कर्मयोगी क्या है?
Mission Karmayogi भारत सरकार का राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम है।
इसे सितंबर 2020 में प्रारंभ किया गया था।
इसका सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है:
प्रशासनिक सुधार का प्रमुख सिद्धांत
Rule-Based
Role-Based
नियम-आधारित से भूमिका-आधारित प्रशासन
इसका अर्थ है कि सरकारी कर्मचारियों को केवल सामान्य नियमों की जानकारी देने के बजाय उनकी वास्तविक जिम्मेदारियों और कार्यों के लिए आवश्यक क्षमताएँ विकसित की जाएँ।
iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म
iGOT Karmayogi एक डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से सरकारी कर्मचारी विभिन्न प्रकार के ऑनलाइन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।
इसमें विशेष रूप से तीन प्रकार की दक्षताओं को विकसित करने पर जोर दिया जाता है:
Domain Competencies: संबंधित विभाग एवं कार्यक्षेत्र का ज्ञान।
Functional Competencies: प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्य करने की क्षमता।
Behavioural Competencies: नेतृत्व, संवाद, नैतिकता और नागरिक-केंद्रित व्यवहार।
उत्तर प्रदेश में मिशन कर्मयोगी
उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में भी iGOT Karmayogi आधारित प्रशिक्षण को अपनाया जा रहा है।
राज्य की विभिन्न आधिकारिक जिला वेबसाइटों पर सरकारी कर्मचारियों के पंजीकरण और प्रशिक्षण के लिए iGOT Karmayogi Portal की जानकारी उपलब्ध है।
सितंबर 2026 में उत्तर प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों को मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत प्रशिक्षण पाठ्यक्रम पूरा करने से संबंधित निर्देशों की जानकारी भी सामने आई थी। महत्वपूर्ण तथ्यात्मक सावधानी: उत्तर प्रदेश में iGOT Karmayogi का उपयोग प्रमाणित है, लेकिन स्वतंत्र आधिकारिक प्लेटफॉर्म के रूप में 'Karmayogi UP' नाम की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए यहाँ इसे अलग राज्य पोर्टल बताने के बजाय मिशन कर्मयोगी के राज्यस्तरीय क्रियान्वयन के रूप में समझना सही होगा।
साधना शृंखला 2026 क्या है?
साधना शृंखला सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों के आधुनिकीकरण से संबंधित क्षेत्रीय परामर्श कार्यशालाओं की श्रृंखला है।
इसका विस्तृत नाम Strengthening Adaptive Development and Humane Aptitude for National Advancement है।
कार्यशालाओं का कार्यक्रम
| क्षेत्र | आयोजन स्थल | तारीख |
|---|---|---|
| दक्षिणी क्षेत्र | विजयवाड़ा | 29–30 सितंबर 2026 |
| पूर्वोत्तर क्षेत्र | गुवाहाटी | अक्टूबर 2026 |
| उत्तरी क्षेत्र | लखनऊ | 23–24 अक्टूबर 2026 |
| पश्चिमी क्षेत्र | पुणे | नवंबर 2026, प्रस्तावित |
प्रशासनिक सुधारों के लिए इसका महत्व
प्रशिक्षण की गुणवत्ता: अधिकारियों की वास्तविक भूमिका और जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जा सकता है।
जवाबदेही: कार्य प्रदर्शन और क्षमता विकास के बीच संबंध मजबूत किया जा सकता है।
डिजिटल गवर्नेंस: तकनीकी प्रशिक्षण से सरकारी सेवाओं की दक्षता बढ़ सकती है।
नागरिक-केंद्रित प्रशासन: कर्मचारियों को नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप सेवा देने के लिए तैयार किया जा सकता है।
Quick Facts — Mission Karmayogi
| तथ्य | उत्तर |
|---|---|
| प्रारंभ | सितंबर 2020 |
| पूरा नाम | National Programme for Civil Services Capacity Building |
| प्रमुख अवधारणा | Rule-Based से Role-Based |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म | iGOT Karmayogi |
| संबंधित संस्था | Capacity Building Commission |
| विशेष प्रयोजन कंपनी | Karmayogi Bharat |
| कार्यशाला | साधना शृंखला 2026 |
| आयोजन स्थल | लखनऊ |
| तारीख | 23–24 अक्टूबर 2026 |
Prelims Focus: मिशन कर्मयोगी, CBC, iGOT Karmayogi, Rule-Based से Role-Based प्रशासन।
Mains GS-II: सिविल सेवा सुधार, प्रशासनिक दक्षता, क्षमता निर्माण और सुशासन।
5. 15 अक्टूबर 2026 Current Affairs: One-Minute Revision
| विषय | सबसे महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| लद्दाख विकास परियोजनाएँ | लगभग ₹3,350 करोड़ |
| NPD मार्ग | लद्दाख का तीसरा सड़क अक्ष |
| NPD सड़क की लंबाई | 298 किमी |
| शिंकू ला सुरंग परियोजना | लगभग 4.1 किमी |
| पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क | सिंधु घाट, लेह |
| न्यायिक सुधार | 100 न्यायिक जिले |
| राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय | 19 |
| न्यायिक मामलों के लिए डेटा प्लेटफॉर्म | NJDG |
| e-Courts Phase III | 2023–2027 |
| मध्यस्थता संबंधी कानून | Mediation Act, 2023 |
| RDI योजना | ₹1 लाख करोड़ |
| ANRF | ANRF Act, 2023 |
| R&D व्यय | 2023–24 में GDP का 0.84% |
| मिशन कर्मयोगी | Rule-Based से Role-Based |
| डिजिटल प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म | iGOT Karmayogi |
| साधना शृंखला कार्यशाला | 23–24 अक्टूबर, लखनऊ |
6. UPSC/UPPCS Prelims 2026: महत्वपूर्ण MCQ
Question: (QID-1)
निम्मू–पदुम–दारचा (NPD) मार्ग के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
यह लद्दाख को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाला तीसरा प्रमुख सड़क अक्ष है।
यह मार्ग जांस्कर घाटी से होकर गुजरता है।
शिंकू ला सुरंग परियोजना का उद्देश्य पूरे वर्ष सड़क संपर्क की सुविधा विकसित करना है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक (b) केवल दो (c) सभी तीन (d) कोई भी नहीं
Answer : c
Solution : तीनों कथन सही हैं। NPD सड़क लद्दाख के लिए तीसरा प्रमुख सड़क संपर्क मार्ग है। यह हिमाचल प्रदेश के दारचा को जांस्कर घाटी के रास्ते निम्मू से जोड़ती है। शिंकू ला सुरंग परियोजना का उद्देश्य भारी बर्फबारी के दौरान भी संपर्क बनाए रखने की क्षमता विकसित करना है। सुरंग परियोजना की पूर्णता और मौजूदा सड़क की स्थिति को अलग-अलग समझना आवश्यक है।
Question: (QID-2)
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए—
| पहल/संस्था | संबंधित उद्देश्य |
|---|---|
| 1. NJDG | न्यायिक मामलों के आँकड़ों का प्रबंधन |
| 2. ANRF | अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन |
| 3. iGOT Karmayogi | सरकारी कर्मचारियों का डिजिटल प्रशिक्षण |
| 4. BRO | वैकल्पिक विवाद समाधान |
कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
(a) केवल एक (b) केवल दो (c) सभी चार (d) केवल तीन
Answer : d
Solution : युग्म 1, 2 और 3 सही हैं। NJDG न्यायिक आँकड़ों का डिजिटल प्लेटफॉर्म है। ANRF अनुसंधान एवं नवाचार को रणनीतिक समर्थन देता है। iGOT Karmayogi सरकारी कर्मचारियों के प्रशिक्षण से संबंधित है। चौथा युग्म गलत है, क्योंकि BRO का संबंध सड़क एवं सामरिक अवसंरचना निर्माण से है, न कि वैकल्पिक विवाद समाधान से।
Question: (QID-3)
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प मध्यस्थता अधिनियम, 2023 के उद्देश्य का सर्वाधिक उपयुक्त वर्णन करता है?
(a) विवादों के समाधान के लिए मध्यस्थता संबंधी विधिक ढाँचा उपलब्ध कराना (b) सभी दीवानी न्यायालयों को समाप्त करना (c) केवल आपराधिक अपीलों के निस्तारण के लिए विशेष न्यायालय स्थापित करना (d) उच्च न्यायालयों को प्रशासनिक रूप से राज्य सरकार के अधीन करना
Answer : a
Solution : मध्यस्थता अधिनियम, 2023 विवादों के मध्यस्थता द्वारा समाधान के लिए विधिक ढाँचे से संबंधित है। मध्यस्थता में एक निष्पक्ष मध्यस्थ पक्षों को आपसी सहमति से विवाद सुलझाने में सहायता करता है। यह न्यायालयों का स्थान पूरी तरह नहीं लेती, बल्कि वैकल्पिक विवाद समाधान का एक माध्यम है।
Question: (QID-4)
मिशन कर्मयोगी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
इसका प्रमुख उद्देश्य नियम-आधारित से भूमिका-आधारित क्षमता निर्माण की ओर बढ़ना है।
iGOT Karmayogi सरकारी कर्मचारियों के डिजिटल प्रशिक्षण से संबंधित है।
Capacity Building Commission मिशन कर्मयोगी के संस्थागत ढाँचे का हिस्सा है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(a) केवल एक (b) सभी तीन (c) केवल दो (d) कोई भी नहीं
Answer : b
Solution : तीनों कथन सही हैं। मिशन कर्मयोगी सिविल सेवकों की भूमिकाओं के अनुरूप आवश्यक दक्षताओं को विकसित करने पर केंद्रित है। iGOT Karmayogi इसका डिजिटल शिक्षण प्लेटफॉर्म है। Capacity Building Commission मिशन के अंतर्गत क्षमता निर्माण व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question: (QID-5)
अनुसंधान, विकास एवं नवाचार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—
ANRF की स्थापना ANRF Act, 2023 के अंतर्गत की गई है।
अक्टूबर 2026 में उन्नत रसायन और सामग्री प्रौद्योगिकियों को RDI योजना के अतिरिक्त पात्र क्षेत्रों में शामिल किया गया।
ANRF और RDI योजना एक ही कानूनी संस्था हैं।
सही कथनों का चयन कीजिए।
(a) केवल 1 और 3 (b) केवल 2 और 3 (c) केवल 1 और 2 (d) 1, 2 और 3
Answer : c
Solution : कथन 1 और 2 सही हैं। ANRF को अनुसंधान एवं नवाचार को रणनीतिक दिशा देने के लिए स्थापित किया गया है। RDI योजना के अंतर्गत उन्नत रसायन, पेट्रोकेमिकल्स एवं सामग्री प्रौद्योगिकी को अतिरिक्त पात्र क्षेत्र बनाया गया है। कथन 3 गलत है, क्योंकि ANRF और RDI योजना अलग-अलग संस्थागत एवं वित्तपोषण व्यवस्थाएँ हैं।
7. UPSC/UPPCS Mains Answer Writing Practice
प्रश्न 1. (GS-III, 150 शब्द)
भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में वैकल्पिक सड़क मार्गों का विकास केवल राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास का भी महत्वपूर्ण साधन है। लद्दाख के संदर्भ में विवेचना कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: सामरिक संपर्क, रसद व्यवस्था, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाएँ, पारिस्थितिक चुनौतियाँ।
प्रश्न 2. (GS-II, 250 शब्द)
न्यायिक प्रणाली में e-Courts और मध्यस्थता जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार के बावजूद भारत में लंबित मामलों की संख्या अधिक क्यों बनी हुई है? न्यायिक सुधारों की उपलब्धियों एवं सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: न्यायिक रिक्तियाँ, प्रक्रियागत विलंब, सरकारी मुकदमेबाजी, डिजिटल असमानता, ADR की सीमाएँ, न्यायिक प्रबंधन।
प्रश्न 3. (GS-III, 150 शब्द)
भारत में अनुसंधान एवं विकास के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी क्यों आवश्यक है? RDI योजना तथा ANRF के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
उत्तर के प्रमुख बिंदु: GERD, तकनीकी आत्मनिर्भरता, विश्वविद्यालय-उद्योग सहयोग, अनुसंधान वित्तपोषण, नवाचार आधारित उद्योग।
प्रश्न 4. (GS-II, 150 शब्द)
मिशन कर्मयोगी का नियम-आधारित से भूमिका-आधारित प्रशासन की ओर परिवर्तन भारतीय प्रशासनिक प्रणाली को किस प्रकार अधिक प्रभावी बना सकता है?
उत्तर के प्रमुख बिंदु: दक्षता आधारित प्रशिक्षण, iGOT Karmayogi, जवाबदेही, कार्य प्रदर्शन, नागरिक-केंद्रित प्रशासन।
8. निष्कर्ष
15 अक्टूबर 2026 के Current Affairs से चार महत्वपूर्ण विषय उभरकर सामने आते हैं।
पहला, लद्दाख की सामरिक परियोजनाएँ राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ क्षेत्रीय विकास और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी उदाहरण हैं।
दूसरा, न्यायिक सुधारों के लिए केवल तकनीक का उपयोग पर्याप्त नहीं है। इसके साथ मानव संसाधन, प्रक्रियागत सुधार और वैकल्पिक विवाद समाधान को भी मजबूत करना आवश्यक है।
तीसरा, भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अनुसंधान निवेश, ANRF, RDI वित्तपोषण और निजी क्षेत्र की भागीदारी महत्वपूर्ण हैं।
चौथा, मिशन कर्मयोगी प्रशासन को नियम-आधारित व्यवस्था से अधिक दक्षता और भूमिका-केंद्रित प्रणाली की ओर ले जाने का प्रयास है।
UPSC और UPPCS की तैयारी में Current Affairs को केवल तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि Static GK, संविधान, अर्थव्यवस्था और Mains Analysis के साथ जोड़कर पढ़ना अधिक उपयोगी है।
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