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RO/ARO 2026: पहली पोस्टिंग कहाँ होती है? जानिए सैलरी, पावर, काम, छुट्टियाँ और प्रमोशन
10/14/2026
UPPSC RO ARO Career Guide 2026 | Lakshya IAS Academy, Lucknow
क्या आप भी उत्तर प्रदेश के सचिवालय में सरकारी नौकरी करने का सपना देखते हैं? ऐसी नौकरी, जिसमें सरकारी प्रशासन को करीब से समझने का अवसर मिले, कार्यालय आधारित काम हो, अच्छा वेतनमान मिले और भविष्य में उच्च पदों पर प्रमोशन की संभावनाएँ भी हों?
यदि हाँ, तो समीक्षा अधिकारी (RO) और सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO) की नौकरी आपके लिए एक आकर्षक करियर विकल्प हो सकती है।
लेकिन RO/ARO परीक्षा की तैयारी करने वाले अधिकांश अभ्यर्थियों के मन में कई सवाल रहते हैं।
क्या चयन के बाद लखनऊ में ही पोस्टिंग मिलेगी? क्या समीक्षा अधिकारी के पास सरकारी फैसले लेने की पावर होती है? क्या शनिवार और रविवार की छुट्टी मिलती है? और क्या RO आगे चलकर संयुक्त सचिव भी बन सकता है?
इस आर्टिकल में इन सभी सवालों के जवाब वास्तविक सेवा व्यवस्था और उपलब्ध सरकारी जानकारियों के आधार पर समझेंगे।
1. RO/ARO की पहली पोस्टिंग कहाँ होती है?
RO/ARO भर्ती परीक्षा के माध्यम से अलग-अलग विभागों के पद भरे जा सकते हैं। इसलिए चयन के बाद हर अभ्यर्थी की पोस्टिंग एक ही शहर या कार्यालय में होना जरूरी नहीं है।
पिछली UPPSC RO/ARO भर्ती में उत्तर प्रदेश सचिवालय, राजस्व परिषद और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के पद शामिल थे।
| विभाग | प्रमुख कार्यस्थल |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश सचिवालय | लखनऊ |
| उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग | प्रयागराज |
| उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद | लखनऊ एवं प्रयागराज से संबंधित कार्यालय |
क्या RO/ARO बनने के बाद जीवनभर लखनऊ में ही रहेंगे?
यह एक आम धारणा है, लेकिन इसे पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता।
यदि नियुक्ति उत्तर प्रदेश सचिवालय में होती है तो लखनऊ में कार्य करने की संभावना प्रमुख होती है। वहीं लोक सेवा आयोग और अन्य विभागों में कार्यालय की स्थिति अलग हो सकती है।
महत्वपूर्ण: पहली पोस्टिंग और भविष्य के स्थानांतरण का निर्णय संबंधित विभाग के नियुक्ति आदेश, सेवा नियमों और प्रशासनिक आवश्यकताओं से होता है।
इसलिए केवल RO/ARO परीक्षा पास करने से लखनऊ में स्थायी पोस्टिंग की गारंटी नहीं मिलती।
2. RO और ARO की सैलरी कितनी होती है?
RO/ARO की नौकरी की चर्चा होते ही सबसे पहले वेतन का सवाल सामने आता है।
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रकाशित रिकॉर्ड में समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी के लिए निम्न वेतन स्तर दर्ज हैं।
| विवरण | RO (समीक्षा अधिकारी) | ARO (सहायक समीक्षा अधिकारी) |
|---|---|---|
| सातवें वेतन आयोग का स्तर | Pay Level 8 | Pay Level 7 |
| पुराने वेतन ढाँचे का ग्रेड पे | ₹4,800 | ₹4,600 |
| शुरुआती बेसिक पे | ₹47,600 | ₹44,900 |
| पे मैट्रिक्स की रेंज | ₹47,600–₹1,51,100 | ₹44,900–₹1,42,400 |
यहाँ एक बात विशेष रूप से समझनी चाहिए—बेसिक सैलरी और इन-हैंड सैलरी एक नहीं होती।
कर्मचारी का कुल वेतन बेसिक पे के साथ लागू महँगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA) तथा अन्य पात्र भत्तों को जोड़कर निर्धारित होता है।
इसके बाद लागू कटौतियाँ, जैसे पेंशन संबंधी अंशदान और आयकर आदि घटाए जाते हैं।
इसी कारण दो कर्मचारियों का Pay Level समान होने पर भी उनके बैंक खाते में आने वाली वास्तविक राशि अलग हो सकती है।
क्या RO की इन-हैंड सैलरी ₹80,000 तक पहुँच सकती है?
अनुभव, वेतन वृद्धि और लागू भत्तों के कारण कुल वेतन या इन-हैंड राशि समय के साथ बढ़ सकती है।
लेकिन हर नए नियुक्त RO को शुरुआत से ₹70,000–₹80,000 इन-हैंड मिलना निश्चित बताना सही नहीं होगा।
सटीक राशि संबंधित समय की भत्ता दरों, नियुक्ति स्थान और कटौतियों पर निर्भर करेगी।
अभ्यर्थियों को केवल अनुमानित इन-हैंड राशि के बजाय आधिकारिक पे मैट्रिक्स को भी समझना चाहिए।
3. क्या RO/ARO को सप्ताह में केवल 5 दिन काम करना होता है?
सचिवालय की नौकरी को आकर्षक बनाने वाला एक महत्वपूर्ण पहलू उसका कार्यालय आधारित कार्य और नियमित कार्यदिवस हैं।
उत्तर प्रदेश सचिवालय स्थित राष्ट्रीय एकीकरण विभाग की आधिकारिक जानकारी में सोमवार से शुक्रवार कार्यदिवस तथा सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक कार्यालय समय दर्ज है।
इस व्यवस्था के अनुसार सामान्यतः शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहता है।
हालाँकि आवश्यक सरकारी कार्य, विशेष आदेश, बैठक या प्रशासनिक परिस्थितियों में अवकाश के दिन भी ड्यूटी लगाई जा सकती है।
ध्यान दें: सभी RO/ARO पदों के लिए एक जैसी साप्ताहिक अवकाश व्यवस्था मान लेना सही नहीं है। यह संबंधित विभाग के कार्यालय नियमों पर निर्भर करेगा।
4. सचिवालय में RO आखिर करता क्या है?
कई छात्र समझते हैं कि RO की नौकरी में केवल फाइलों पर हस्ताक्षर करने होते हैं।
वास्तव में समीक्षा अधिकारी का कार्य कार्यालयी प्रशासन, सरकारी दस्तावेजों और नियमों से जुड़ा होता है।
RO की प्रमुख जिम्मेदारियाँ
- सरकारी फाइलों और दस्तावेजों का परीक्षण करना।
- निर्धारित नियमों के अनुसार फाइल पर नोटिंग तैयार करना।
- विभागीय पत्रों एवं आदेशों के मसौदे तैयार करना।
- वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष संबंधित प्रकरण प्रस्तुत करना।
- कार्यालयी पत्राचार और अभिलेखों से संबंधित कार्य करना।
- अनुभागीय कार्यों के समयबद्ध निस्तारण में योगदान देना।
- संबंधित विभाग के प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार कार्य करना।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए कि किसी विभाग में किसी सरकारी योजना के क्रियान्वयन से संबंधित फाइल प्राप्त होती है।
उस फाइल में पूर्व आदेश, लागू नियम, संबंधित पत्राचार और प्रस्तावित कार्यवाही जैसी जानकारियाँ हो सकती हैं।
समीक्षा अधिकारी अपने निर्धारित दायित्व के अंतर्गत इन दस्तावेजों की जाँच कर सकता है, आवश्यक टिप्पणी तैयार कर सकता है और फाइल को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे भेज सकता है।
इसके बाद सक्षम अधिकारी संबंधित नियमों के अनुसार निर्णय लेता है।
इस उदाहरण से स्पष्ट है कि RO की भूमिका फाइलों और प्रशासनिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होती है, लेकिन प्रत्येक सरकारी निर्णय का अंतिम अधिकार उसी के पास नहीं होता।
5. RO की पावर कितनी होती है? Myth vs Reality
RO/ARO की नौकरी को लेकर सोशल मीडिया पर अनेक दावे देखने को मिलते हैं। इसलिए वास्तविक अधिकारों को समझना आवश्यक है।
| छात्रों में प्रचलित धारणा | वास्तविक स्थिति |
|---|---|
| RO केवल एक क्लर्क होता है। | RO के पास निर्धारित प्रशासनिक एवं फाइल संबंधी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ हो सकती हैं। |
| RO किसी भी सरकारी फाइल पर अंतिम निर्णय ले सकता है। | अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी और नियमों पर निर्भर करता है। |
| RO के पास SDM जैसी शक्तियाँ होती हैं। | दोनों पदों की सेवा प्रकृति और वैधानिक अधिकार अलग हैं। |
| RO सीधे सरकारी नीतियाँ बनाता है। | RO नीति संबंधी प्रशासनिक प्रक्रिया में अपनी निर्धारित भूमिका निभा सकता है, लेकिन स्वतंत्र नीति-निर्माण का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होता। |
| RO की हमेशा लखनऊ में पोस्टिंग होती है। | वास्तविक नियुक्ति संबंधित विभाग एवं सेवा नियमों पर निर्भर करती है। |
निष्कर्ष: समीक्षा अधिकारी की वास्तविक प्रतिष्ठा उसकी प्रशासनिक जिम्मेदारी, सरकारी नियमों की समझ और कार्यालयी कार्यों में योगदान से जुड़ी है, न कि ऐसी शक्तियों से जो उसे नियमों में दी ही नहीं गई हैं।
6. ARO बनने के लिए O Level और हिंदी टाइपिंग क्यों जरूरी है?
सहायक समीक्षा अधिकारी का कार्य कंप्यूटर, दस्तावेजों और कार्यालयी प्रक्रियाओं से जुड़ा होता है। इसलिए संबंधित भर्ती में तकनीकी योग्यता का महत्व होता है।
UPPSC RO/ARO 2023 के भर्ती विज्ञापन में संबंधित ARO पदों के लिए निम्न योग्यताएँ निर्धारित थीं।
- मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या समकक्ष योग्यता।
- DOEACC/NIELIT का O Level प्रमाणपत्र अथवा संबंधित पद के लिए मान्य समकक्ष योग्यता।
- हिंदी टाइपिंग में न्यूनतम 25 शब्द प्रति मिनट की गति।
- अंग्रेजी टाइपिंग का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को विज्ञापन के अनुसार वरीयता दिए जाने का प्रावधान।
लोक सेवा आयोग के कुछ पदों के लिए कंप्यूटर विज्ञान में डिप्लोमा का विकल्प भी संबंधित विज्ञापन में दिया गया था।
क्या RO के लिए भी O Level और टाइपिंग अनिवार्य है?
सभी समीक्षा अधिकारी पदों पर सहायक समीक्षा अधिकारी की योग्यता संबंधी शर्तों को एक समान लागू नहीं किया जा सकता।
सामान्य RO और RO के विशेष पदों के लिए शैक्षिक योग्यता अलग हो सकती है।
अभ्यर्थियों को 2026 की संबंधित भर्ती का आधिकारिक विज्ञापन देखकर ही अंतिम पात्रता तय करनी चाहिए।
7. RO/ARO का प्रमोशन कहाँ तक हो सकता है?
सरकारी नौकरी में वेतन के अलावा करियर ग्रोथ भी महत्वपूर्ण होती है।
उत्तर प्रदेश सचिवालय के संबंधित सेवा संवर्गों में समीक्षा अधिकारी से आगे उच्च पदों पर पदोन्नति की व्यवस्था उपलब्ध है।
सचिवालय में संभावित करियर प्रगति
सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO)
↓
समीक्षा अधिकारी (RO)
↓
अनुभाग अधिकारी (Section Officer)
↓
अनु सचिव (Under Secretary)
↓
उप सचिव (Deputy Secretary)
↓
संयुक्त सचिव (Joint Secretary)
इसके आगे कुछ संबंधित सेवा संवर्गों में विशेष सचिव जैसे उच्च पद भी होते हैं।
लेकिन इस क्रम को प्रत्येक ARO या RO के लिए निश्चित प्रमोशन योजना नहीं समझना चाहिए।
इसमें संबंधित संवर्ग के सेवा नियम, भर्ती का स्रोत, वरिष्ठता, पात्रता, उपलब्ध रिक्तियाँ और चयन प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती हैं।
विशेष रूप से विभिन्न विभागों और सचिवालय सेवाओं की पदोन्नति व्यवस्था में अंतर हो सकता है।
क्या RO आगे चलकर संयुक्त सचिव बन सकता है?
संबंधित सेवा नियमों के अंतर्गत उच्च पदों तक पदोन्नति का मार्ग मौजूद हो सकता है।
लेकिन यह सेवा के दौरान स्वचालित रूप से मिलने वाला लाभ नहीं है। इसके लिए नियमों के अनुसार पात्रता और पदोन्नति आवश्यक होती है।
इसलिए इसे एक संभावित करियर अवसर के रूप में देखना चाहिए, न कि निश्चित परिणाम के रूप में।
8. RO और ARO में कौन-सा पद बेहतर है?
| तुलना | RO | ARO |
|---|---|---|
| पदक्रम | सामान्यतः उच्च | सहायक स्तर |
| वेतन स्तर का आधिकारिक उदाहरण | Level 8 | Level 7 |
| शुरुआती बेसिक पे का उदाहरण | ₹47,600 | ₹44,900 |
| कार्य की प्रकृति | फाइल परीक्षण, समीक्षा, नोटिंग एवं प्रशासनिक कार्य | कंप्यूटर, टाइपिंग, दस्तावेज एवं कार्यालयी सहयोग |
| कार्यालय | विभागीय आवंटन के अनुसार | विभागीय आवंटन के अनुसार |
| करियर ग्रोथ | संबंधित सेवा नियमों के अनुसार | संबंधित सेवा नियमों के अनुसार |
पदक्रम और शुरुआती वेतन के दृष्टिकोण से RO सामान्यतः उच्च पद है।
हालाँकि नौकरी का चयन करते समय विभाग, कार्यस्थल, पद की जिम्मेदारियाँ और भविष्य के अवसर भी देखना चाहिए।
9. क्या RO/ARO की नौकरी IAS या PCS से बेहतर है?
RO/ARO और IAS/PCS की तुलना केवल वेतन या नौकरी की सुविधा के आधार पर नहीं की जानी चाहिए।
IAS और PCS जैसी सेवाओं में पद के अनुसार व्यापक प्रशासनिक, कार्यकारी और क्षेत्रीय जिम्मेदारियाँ हो सकती हैं।
इसके विपरीत RO/ARO की भूमिका मुख्यतः संबंधित कार्यालय और सचिवालय की प्रशासनिक व्यवस्था में होती है।
जो अभ्यर्थी कार्यालय आधारित काम, प्रशासनिक दस्तावेजों और अपेक्षाकृत नियमित कार्यदिवसों वाली नौकरी पसंद करते हैं, उनके लिए RO/ARO अच्छा विकल्प हो सकता है।
वहीं क्षेत्रीय प्रशासन और व्यापक कार्यकारी जिम्मेदारी में रुचि रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए अन्य प्रशासनिक सेवाएँ अधिक उपयुक्त हो सकती हैं।
दोनों का स्वरूप अलग है और करियर का सही चुनाव व्यक्तिगत रुचि पर निर्भर करता है।
10. RO/ARO 2026 की तैयारी कैसे करें?
यदि आपका लक्ष्य समीक्षा अधिकारी या सहायक समीक्षा अधिकारी बनना है, तो केवल नौकरी की सुविधाओं के बारे में जानना पर्याप्त नहीं होगा।
इसके लिए परीक्षा के पाठ्यक्रम और प्रश्नों की प्रकृति को समझते हुए व्यवस्थित तैयारी करनी होगी।
पिछले भर्ती चक्र के प्रारंभिक परीक्षा प्रारूप में सामान्य अध्ययन के 140 प्रश्न और सामान्य हिंदी के 60 प्रश्न निर्धारित थे।
इसलिए सामान्य हिंदी को कम महत्व देना एक बड़ी रणनीतिक गलती हो सकती है।
तैयारी में इन बातों पर ध्यान दें
- सामान्य अध्ययन के सभी प्रमुख विषयों को व्यवस्थित रूप से पढ़ें।
- सामान्य हिंदी के शब्दज्ञान और व्याकरण वाले भाग का नियमित अभ्यास करें।
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों से प्रश्नों की प्रकृति समझें।
- समयबद्ध मॉक टेस्ट देकर अपनी गति और सटीकता बढ़ाएँ।
- प्रारंभिक परीक्षा के साथ मुख्य परीक्षा की तैयारी भी करें।
- मुख्य परीक्षा के लिए हिंदी लेखन, कार्यालयी प्रारूप और ड्राफ्टिंग का अभ्यास करें।
- नवीनतम आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं परीक्षा संबंधी निर्देशों के अनुसार तैयारी में बदलाव करें।
Lakshya IAS Academy के साथ RO/ARO की तैयारी
यदि आप RO/ARO की तैयारी को एक व्यवस्थित दिशा देना चाहते हैं, तो Lakshya IAS Academy, Telibagh, Lucknow के RO/ARO उड़ान 6.0 बैच (Prelims + Mains) के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस बैच में विषयवार अध्ययन, टेस्ट और अभ्यास के माध्यम से प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा की तैयारी को व्यवस्थित करने पर जोर दिया जाता है।
बैच की जानकारी एवं प्रवेश संबंधी संपर्क:
Lakshya IAS Academy
Telibagh, Lucknow
मोबाइल: 8182093320, 9236575773
वेबसाइट: https://www.lakshyaiasacademy.in/
11. RO/ARO की नौकरी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. RO/ARO में चयन के बाद क्या लखनऊ में ही पोस्टिंग मिलती है?
उत्तर: सचिवालय के पदों में लखनऊ महत्वपूर्ण कार्यस्थल है, लेकिन प्रत्येक चयनित अभ्यर्थी के लिए लखनऊ में स्थायी पोस्टिंग की गारंटी नहीं होती।
Q2. समीक्षा अधिकारी की शुरुआती बेसिक सैलरी कितनी है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रकाशित रिकॉर्ड में RO के Pay Level 8 में शुरुआती बेसिक पे ₹47,600 दर्ज है। अन्य संवर्गों में संबंधित सेवा नियम देखना आवश्यक है।
Q3. क्या RO को शनिवार और रविवार की छुट्टी मिलती है?
उत्तर: सचिवालय के कुछ विभागों में सोमवार से शुक्रवार की कार्यदिवस व्यवस्था है। हालांकि कार्यालय, विशेष सरकारी कार्य और लागू आदेशों के अनुसार छुट्टी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
Q4. क्या ARO के लिए हिंदी टाइपिंग जरूरी है?
उत्तर: UPPSC RO/ARO 2023 के संबंधित ARO पदों में हिंदी टाइपिंग की न्यूनतम गति 25 शब्द प्रति मिनट निर्धारित थी। नई भर्ती में अंतिम शर्तें आधिकारिक विज्ञापन के अनुसार होंगी।
Q5. क्या RO एक राजपत्रित अधिकारी होता है?
उत्तर: किसी पद की राजपत्रित या अराजपत्रित स्थिति का निर्धारण केवल उसके ग्रेड पे से नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित सेवा नियम और सरकारी वर्गीकरण देखना जरूरी है।
Q6. क्या RO आगे चलकर संयुक्त सचिव बन सकता है?
उत्तर: संबंधित सचिवालय सेवा में उच्च पदों पर पदोन्नति के नियम मौजूद हैं, लेकिन संयुक्त सचिव पद तक पहुँचना वरिष्ठता, पात्रता, रिक्तियों और पदोन्नति की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
Q7. क्या RO/ARO की नौकरी में बहुत ज्यादा काम होता है?
उत्तर: कार्यभार संबंधित विभाग और अनुभाग के अनुसार बदलता रहता है। समयबद्ध सरकारी कार्यों के दौरान अतिरिक्त जिम्मेदारियाँ भी निभानी पड़ सकती हैं।
निष्कर्ष
RO/ARO की नौकरी केवल एक सरकारी पद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनने का अवसर है।
सचिवालय जैसे महत्वपूर्ण कार्यालयों में काम करने की संभावना, निर्धारित वेतनमान, कार्यालय आधारित जिम्मेदारियाँ और उच्च पदों तक पदोन्नति के संभावित अवसर इस करियर को आकर्षक बनाते हैं।
हालांकि केवल अच्छी सैलरी, लखनऊ में पोस्टिंग या सप्ताह में पाँच कार्यदिवस जैसी बातों के आधार पर नौकरी का चुनाव नहीं करना चाहिए। वास्तविक सेवा शर्तों और अपनी रुचि को समझना भी आवश्यक है।
यदि आपका सपना RO/ARO बनना है, तो नौकरी के आकर्षण से आगे बढ़कर परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दीजिए। सही रणनीति, नियमित अभ्यास और निरंतर अध्ययन ही सफलता की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
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